आदर्श नगर स्थित मंदिर में अक्षय तृतीया पर 125 किलो वजनी पीतल के ध्वजदंड का पूजन और स्थापना की गई, जिसमें विधायक काली चरण सराफ समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए।

आदर्श नगर स्थित श्रीराम मंदिर प्रन्यास सनातन धर्म सभा के तत्वावधान में श्रीराम मंदिर का 71वां स्थापना दिवस (पाटोत्सव) अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर आयोजित इस दो दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के दूसरे दिन, सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य पं. बनवारी लाल शर्मा के सानिध्य में आयोजित भव्य हवन-पूजन से हुआ, जहाँ वैदिक मंत्रोच्चार की गूँज ने संपूर्ण वातावरण को पावन कर दिया। इस गौरवमयी अवसर पर हरचरण लेकर, रानी लेकर, विक्रम लेकर एवं करण लेकर ने बालाजी की प्रतिमा पर पूर्ण विधि-विधान के साथ पीतल के विशाल ध्वजदंड का पूजन कर उसकी स्थापना संपन्न की।

महामंत्री अनिल खुराना ने ध्वज की विशिष्टताओं की जानकारी देते हुए बताया कि इस भव्य ध्वजा का कुल वजन 125 किलो है और इसके दंड की ऊंचाई 26 फीट निर्धारित की गई है। 3 फुट चौड़ी और 4 फीट लंबी इस ध्वजा पर तीन अत्यंत महत्वपूर्ण प्रतीकों को अंकित किया गया है। इसमें रघुकुल के प्रतीक 'कोविदार वृक्ष' (कचनार) को स्थान दिया गया है, जो प्राचीन काल में सूर्यवंश के राजाओं के ध्वज की शोभा बढ़ाता था। दूसरा चिन्ह 'सूर्य देव' का है, जो सत्य, धर्म, ज्ञान और अंधकार को मिटाकर प्रकाश फैलाने का संदेश देते हैं। तीसरा चिन्ह 'ओम' का है, जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा और सनातन धर्म की शाश्वतता का प्रतीक है।

धार्मिक आयोजन की कड़ियाँ जोड़ते हुए कोषाध्यक्ष लक्ष्मण मलिक ने बताया कि महिला मंडल द्वारा प्रस्तुत भजनों ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। पाटोत्सव के उपलक्ष्य में भगवान को नवीन मनमोहक पोशाक धारण कराई गई और संपूर्ण गर्भगृह को ऋतु पुष्पों से भव्य रूप में सजाया गया। प्राकट्य आरती के समय उमड़े श्रद्धालुओं के सैलाब ने प्रभु के चरणों में अपनी आस्था अर्पित की। इस भव्य आयोजन में क्षेत्रीय विधायक काली चरण सराफ, भाजपा नेता सरदार अजयपाल सिंह, देवेंद्र सिंह शंटी, चंद्र भाटिया, किशोर मोतियानी, मेहर परनामी, नितिन भाटिया और गुलशन खत्री सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शिरकत की और अंत में आयोजित विशाल प्रसादी (भोजन) ग्रहण की।

ध्वजा के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए पं. बनवारी लाल शर्मा ने कहा कि सनातन हिंदू धर्म में मंदिर शिखर पर ध्वजा की स्थापना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का संचरण है। इसे "रक्षा ध्वज" की संज्ञा दी गई है, जो मंदिर और आसपास के संपूर्ण क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। ऐसी मान्यता है कि ध्वजा में नवग्रहों और देवताओं का सूक्ष्म निवास होता है, जिससे भक्तों को आध्यात्मिक सुरक्षा की अनुभूति होती है। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि ध्वज स्तंभ को देखकर ही देवगण सूक्ष्म रूप में यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों में उपस्थिति दर्ज कराते हैं। उगते सूर्य की रश्मियों को स्वयं में समाहित करने वाली यह ध्वजा जीवन में आशा और निर्भयता का संचार करती है। इस सफल आयोजन में मंदिर समिति के राजीव मनचंदा, रवि सचदेवा, हाकिम गेरा, जितेंद्र चड्ढा, रमेश गुलाटी और मीडिया प्रभारी तुलसी संगतानी ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।

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