जयपुर, 30 दिसम्बर। किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, पारदर्शी व्यवस्था और कानूनी संरक्षण देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में बीज विधेयक 2025 को देखा जा रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को पंत कृषि भवन के सभा कक्ष में कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल की अध्यक्षता में कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विधेयक की व्यापक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें इसके प्रावधानों, व्यावहारिक प्रभावों और किसानों को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. किरोड़ी लाल ने कहा कि बीज विधेयक 2025 किसानों के अधिकारों की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण बीज की सुनिश्चित उपलब्धता और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता स्थापित करने वाला एक दूरदर्शी कानून साबित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और यह विधेयक खेती में सुधार के साथ प्रदेश की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष भर में कृषि मंत्री द्वारा उर्वरक, बीज एवं पेस्टिसाइड बनाने वाले विनिर्माताओं और विक्रेताओं की व्यापक जांच कराई गई, जिसमें कई अनियमितताएं सामने आईं। इसी दौरान किसानों की समस्याओं को मौके पर जाकर सुना और समझा गया। इन अनुभवों के आधार पर डॉ. किरोड़ी लाल ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री को सीड बिल में संशोधन और बीज में मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाने के सुझाव के साथ पत्र लिखा, जिसे स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार ने सीड बिल 2025 प्रस्तुत किया। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि जल्द ही उर्वरक और पेस्टिसाइड से संबंधित विधेयक भी लाए जाएंगे।

समीक्षा बैठक के दौरान सवाई माधोपुर में 18 और 19 जनवरी को आयोजित होने वाले अमरूद महोत्सव एवं उन्नत कृषि तकनीकी मेले की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। डॉ. किरोड़ी लाल ने महोत्सव की विस्तृत जानकारी लेते हुए अधिकारियों को किसानों के ठहरने, भोजन और परिवहन की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अमरूद की विभिन्न किस्मों और प्रसंस्करण के बाद तैयार किए जाने वाले उत्पादों की जानकारी भी प्राप्त की।

बैठक में बताया गया कि अमरूद सवाई माधोपुर के पंच गौरवों में शामिल है और अमरूद महोत्सव का उद्देश्य इसे केवल एक फल के रूप में नहीं, बल्कि जिला गौरव, आजीविका और उद्यमिता के प्रतीक के रूप में स्थापित करना है। अमरूद कम अवधि में उत्पादन देने वाली, पोषण से भरपूर और बहुउपयोगी फल फसल है। सवाई माधोपुर जिले में वर्तमान में लगभग 15 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में 20 हजार से अधिक किसान इसकी व्यावसायिक खेती कर रहे हैं।

कार्यक्रम के अंत में पंत कृषि भवन में डॉ. किरोड़ी लाल द्वारा समन्वित कृषि प्रणाली से समृद्ध किसानों की सफलता की कहानियां तथा जैविक खेती से समृद्ध कृषकों की सफलता की कहानियों पर आधारित पुस्तिकाओं का विमोचन किया गया। बैठक में प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी श्रीमती मंजू राजपाल, आयुक्त कृषि सुश्री चिन्मयी गोपाल, आयुक्त उद्यानिकी श्रीमती शुभम चौधरी, निदेशक राजस्थान राज्य जैविक बीज प्रमाणिकरण संस्था श्री के.सी. मीणा, अतिरिक्त निदेशक कृषि (आदान) श्री गोपाल लाल, अतिरिक्त निदेशक कृषि (विस्तार) श्री एस.एस. शेखावत सहित विभागीय अधिकारी और सवाई माधोपुर से कृषि एवं उद्यानिकी अधिकारी उपस्थित रहे। यह बैठक प्रदेश की कृषि नीति को किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में एक निर्णायक पहल के रूप में सामने आई।

Pratahkal Newsroom

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