जयपुर। राजस्थान की ग्रामीण कला और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखते हुए मंगलवार को राजधानी जयपुर के चौपाल प्रशिक्षण केंद्र में 'उन्मुखीकरण-सह-संवाद' कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। राजस्थान राज्य ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्राफ्ट्स एंड डिज़ाइन (IICD) के साझा प्रयासों से आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला ने प्रदेश की महिला आर्टिजनों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं। इस महत्वपूर्ण पहल का केंद्र बिंदु स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं की पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप ढालना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना रहा।

कार्यशाला का आगाज बेहद ऊर्जावान रहा, जिसमें राजस्थान के 16 विभिन्न जिलों से आईं 25 चुनिंदा महिला आर्टिजनों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान आईआईसीडी की निदेशक डॉ. तूलिका गुप्ता, चीफ मैनेजर (प्रोजेक्ट्स एवं इनक्यूबेशन) सुश्री रश्मि पारीक, फील्ड ऑफिसर श्री धर्मेंद्र सिंह और रिसर्च असिस्टेंट सुश्री अनुष्का मुखर्जी ने तकनीकी विशेषज्ञों के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं राजीविका की ओर से राज्य परियोजना प्रबंधक डॉ. रमणिका कौर ने परिषद के विजन को साझा करते हुए महिला उद्यमियों का उत्साहवर्धन किया। विशेषज्ञों और कलाकारों के बीच हुए इस जीवंत संवाद ने कला और तकनीक के संगम को धरातल पर उतारने का कार्य किया।

कार्यक्रम के मुख्य चरण में महिला आर्टिजनों द्वारा अपने पैतृक जिलों से लाए गए उत्पादों की एक विशेष प्रदर्शनी लगाई गई। इस दौरान विशेषज्ञों ने सूक्ष्मता से उत्पादों का अवलोकन किया और वर्तमान वैश्विक बाजार की प्रतिस्पर्धी आवश्यकताओं पर विस्तार से चर्चा की। संवाद के दौरान यह तथ्य उभरकर आया कि महिला कारीगरों में हुनर की कोई कमी नहीं है, परंतु कच्चे माल की सुलभता, मानकीकृत पैकेजिंग, प्रभावी ब्रांडिंग और सही मूल्य निर्धारण जैसी रणनीतिक समझ को और अधिक विकसित करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ उनके प्रमाणीकरण और डिजाइन में आधुनिक बदलाव लाने पर विशेष जोर दिया।

आधुनिक युग की मांग को देखते हुए कार्यशाला में डिजिटल मार्केटिंग और तकनीक के उपयोग पर विशेष विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने उत्पाद फोटोग्राफी, व्हाट्सएप बिजनेस का प्रबंधन और विभिन्न ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने के गुर सिखाए। इस दौरान आईआईसीडी ने एक महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता दोहराते हुए घोषणा की कि वे महिला आर्टिजनों के लिए उत्पाद विकास, पैकेजिंग और विपणन से संबंधित विशेष कस्टमाइज्ड प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करेंगे। इसके साथ ही भविष्य में स्थानीय स्तर पर भी गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि ग्रामीण उद्यमों की स्थिरता और प्रतिस्पर्धात्मकता को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

राजीविका की यह पहल केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम मात्र नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के ढांचे को मजबूत करने की एक दूरगामी योजना है। तकनीकी विशेषज्ञों और महिला कलाकारों के बीच स्थापित हुआ यह सेतु आने वाले समय में राजस्थान की पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार में एक प्रतिष्ठित ब्रांड के रूप में स्थापित करेगा। यह कार्यशाला इस विश्वास के साथ संपन्न हुई कि जब पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक और सही मार्गदर्शन का साथ मिलता है, तो वह न केवल एक परिवार बल्कि पूरे समाज की आर्थिक दिशा बदलने का सामर्थ्य रखता है।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story