जयपुर, 20 अक्टूबर। गोविन्द नगर, गालव भाग में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर सामाजिक समरसता, संगठन शक्ति और भारतीय परिवार व्यवस्था को सुदृढ़ करने का आह्वान किया गया। मंगलवार सुबह 7.15 बजे गंगापोल स्थित मुंशी राम दास जी के गार्डन में आयोजित कार्यक्रम में शस्त्र पूजन, शारीरिक प्रदर्शन और बौद्धिक के माध्यम से राष्ट्रभक्ति, सामाजिक एकता तथा संगठन के महत्व पर प्रकाश डाला गया। उत्सव के बाद त्रिवेणी पथ संचलन निकाला गया, जिसका विभिन्न मार्गों पर आमजन ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन श्री सचिन जी टिम्बले उपस्थित रहे। श्री अशोक जैन, माननीय भाग संघचालक का सानिध्य प्राप्त हुआ। बौद्धिक वक्ता के रूप में जयपुर प्रान्त के सह व्यवस्था प्रमुख श्री दिनेश जी ने विचार व्यक्त किए।

बौद्धिक संबोधन में वक्ता ने कहा कि विजयादशमी केवल भगवान श्रीराम की रावण पर विजय का पर्व नहीं है, बल्कि यह असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक है। यह पर्व व्यक्ति को अपनी आंतरिक दुर्बलताओं को दूर करने और समाज तथा राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि भारत की पराधीनता के प्रमुख ऐतिहासिक कारणों में सामाजिक बिखराव और संगठन का अभाव भी शामिल रहे। विदेशी आक्रांताओं और अंग्रेजी शासन के दौरान भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक गौरव तथा पारिवारिक परंपराओं को कमजोर करने के प्रयास किए गए। स्वतंत्रता के बाद भी भारतीय इतिहास के गौरवशाली पक्षों को समुचित महत्व देने की आवश्यकता बनी हुई है। वक्ता ने कहा कि वर्तमान समय में भारत को अस्थिर करने के उद्देश्य से किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रयासों के प्रति समाज को सजग रहना होगा।

शस्त्र पूजन की परंपरा पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में शस्त्र और शास्त्र दोनों का विशेष महत्व रहा है। शस्त्र शक्ति, सुरक्षा और आत्मरक्षा के प्रतीक हैं, जबकि शास्त्र विवेक, ज्ञान और उचित मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। समाज को दोनों के महत्व को समझते हुए शारीरिक और बौद्धिक रूप से सशक्त बनना चाहिए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के उद्देश्यों का उल्लेख करते हुए वक्ता ने कहा कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले, निःस्वार्थ भाव से कार्य करने वाले तथा शारीरिक और बौद्धिक रूप से सशक्त व्यक्तियों का निर्माण आवश्यक है। संगठन का उद्देश्य समाज को एकजुट करना और हिंदू समाज में आपसी विश्वास, सहयोग तथा राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि पिछले 100 वर्षों में संघ के कार्य के माध्यम से ऐसे स्वयंसेवकों का निर्माण हुआ है, जो जाति-पाति और भेदभाव से ऊपर उठकर समाज एवं राष्ट्र के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं।

कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने शारीरिक प्रदर्शन के माध्यम से अनुशासन, सामूहिकता और संगठन शक्ति का परिचय दिया। इसके बाद अल्पाहार हुआ और त्रिवेणी पथ संचलन निकाला गया। संचलन मुंशी राम दास जी के गार्डन से शुरू होकर जोरावर सिंह गेट तक पहुंचा। वहां से यह तीन अलग-अलग मार्गों पर विभाजित हुआ और बाद में रामगढ़ मोड़ पर पुनः एकत्र हुआ। इसके बाद संचलन जलमहल की पाल पर पहुंचकर संपन्न हुआ।

संचलन के कॉलोनी और मुख्य मार्गों से गुजरने के दौरान लोगों ने इसकी सराहना की। आमजन ने पुष्प वर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के नागरिक उपस्थित रहे।

उत्सव के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि संगठित, संस्कारवान, समरस और राष्ट्रनिष्ठ समाज के निर्माण की शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक परिवार से होती है।

गोविन्द सिंह, नगर कार्यवाह, गोविन्द नगर।

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