जयपुर की हुंकार: आदिवासी युवाओं ने 'युवा संसद' में दिखाया नेतृत्व का दम, IPS किशन सहाय ने पाखंड छोड़ वैज्ञानिक सोच अपनाने का दिया संदेश
जयपुर के एमिटी विश्वविद्यालय में आयोजित 17वें आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम में युवाओं ने योग और 'युवा संसद' के जरिए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। IPS किशन सहाय मीणा के ओजस्वी भाषण से लेकर स्वदेशी तकनीक और करियर गाइडेंस तक, इस रिपोर्ट में जानें कैसे आदिवासी युवा वैज्ञानिक सोच के साथ 'विकसित भारत' के संकल्प को सिद्ध कर रहे हैं।

(जयपुर, 18 जनवरी 2026) – गुलाबी नगरी जयपुर में एमिटी विश्वविद्यालय के प्रांगण में एक नया इतिहास रचा जा रहा है। अवसर है 17वें आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का, जहाँ देश के सुदूर क्षेत्रों से आए आदिवासी युवाओं की ऊर्जा और उनके तार्किक सवालों ने 'विकसित भारत' की एक नई तस्वीर पेश की है। नेहरू युवा केंद्र संगठन (MY Bharat), युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस आठ दिवसीय शिविर के तीसरे दिन आदिवासी युवाओं ने न केवल योग से अपने दिन की शुरुआत की, बल्कि 'युवा संसद' के मंच से नीति-निर्धारकों की तरह देश की ज्वलंत समस्याओं पर अपनी बेबाकी भी जाहिर की।
सत्र के दौरान बौद्धिक विमर्श तब अपने चरम पर पहुँच गया जब मुख्य वक्ता और वरिष्ठ IPS अधिकारी किशन सहाय मीणा ने मंच संभाला। उन्होंने समाज में व्याप्त रूढ़िवादिता पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि 145 करोड़ की जनसंख्या वाला देश आज भी छोटी-छोटी तकनीकों और रक्षा प्रणालियों के लिए विदेशी आयात पर निर्भर है। उन्होंने तीखे लहजे में समाज को आईना दिखाते हुए कहा कि आज लोग मंदिरों और मूर्तियों के दान में तो प्रतिस्पर्धा करते हैं, लेकिन जब बात आदिवासी बेटियों के लिए हॉस्टल या कंप्यूटर लैब बनाने की आती है, तो हाथ पीछे खींच लिए जाते हैं। मीणा ने युवाओं से आह्वान किया कि वे उस डर और पाखंड की बेड़ियों को तोड़ दें जो बचपन से उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temperament) को कुचल देती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि साहस और तर्क ही वह माध्यम हैं जिनसे एक सशक्त समाज का निर्माण संभव है।
दिन की शुरुआत आध्यात्मिक और शारीरिक ऊर्जा के समन्वय के साथ हुई। कड़कड़ाती ठंड के बीच युवाओं ने प्रशिक्षित योग शिक्षकों के मार्गदर्शन में सूर्य नमस्कार, वृक्षासन और प्राणायाम का अभ्यास किया। योग प्रशिक्षक डॉ. पूनम त्रिवेदी ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक स्थिरता प्राप्त करने का वह मार्ग है जो उनके आत्मविकास में मील का पत्थर साबित होगा। इसके पश्चात, अकादमिक सत्र में हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ. राजेश्वरी भार्गव ने राजभाषा के आधिकारिक उपयोग की महत्ता बताई और युवाओं को अपनी मातृभाषा के साथ-साथ राष्ट्रभाषा पर गर्व करने की सीख दी।
उच्च शिक्षा और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए एमिटी यूनिवर्सिटी के उपकुलपति प्रोफेसर जी.के. असेरी ने 'स्वदेशी और तकनीक' के अनूठे संगम का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि भारत के पास कौशल और संसाधनों की कोई कमी नहीं है, बस ज़रूरत है इसे आधुनिक तकनीक से जोड़कर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की। इसी क्रम में एयू फाउंडेशन के हेड प्रोग्राम मैनेजर आदित्य चौधरी ने स्कॉलरशिप और उच्च शिक्षा की बारीकियों को साझा किया, जबकि शांतनु बनर्जी ने केंद्र व राज्य सरकार की जनजातीय कल्याणकारी योजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। वहीं, दक्ष प्रशिक्षक बाबूलाल सुसावत ने युवाओं को उद्यमिता और प्रबंधकीय कौशल के गुण सिखाकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया।
दोपहर के बाद शिविर का प्रांगण वैचारिक युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया। 'युवा संसद' के दौरान प्रतिभागियों ने लोकतांत्रिक मूल्यों को आत्मसात करते हुए सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर तार्किक बहस की, जिससे उनके भीतर छिपे भविष्य के राजनेताओं की झलक देखने को मिली। पोस्टर और निबंध प्रतियोगिताओं के माध्यम से 'विकसित भारत' की कल्पना को रंगों और शब्दों में उकेरा गया। दिन का समापन एक भव्य सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ, जहाँ आदिवासी लोक गीतों और पारंपरिक नृत्यों की अनूठी छटा ने आधुनिकता और परंपरा के सुंदर मिलन को जीवंत कर दिया। यह आयोजन न केवल कौशल विकास का मंच बना है, बल्कि यह उन आदिवासी युवाओं के आत्मविश्वास की गर्जना है जो अब भारत के मुख्यधारा के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने को तैयार हैं।

Pratahkal Bureau
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