जयपुर: पत्रकारिता की जीवंत विरासत 'मेरी मुलाकातें' का विमोचन, राज्यपाल ने बताया समय का महती दस्तावेज
जयपुर में राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे और विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने वरिष्ठ पत्रकार व विधायक श्री गोपाल शर्मा की पुस्तक 'मेरी मुलाकातें' का विमोचन किया। रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव की गरिमामय उपस्थिति में राज्यपाल ने पत्रकारिता के साक्षात्कारों को समय का जीवंत दस्तावेज बताया। भारतीय मूल्यों और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर आधारित यह लेख पढ़ें।

जयपुर। राजस्थान की राजधानी में शनिवार को शब्द शिल्पी और सत्ता के गलियारों के बीच एक अनूठा संगम देखने को मिला। जयपुर के लोकभवन स्थित राज्यपाल सचिवालय में आयोजित एक गरिमामय समारोह में प्रदेश के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने वरिष्ठ पत्रकार एवं विधायक श्री गोपाल शर्मा की बहुप्रतीक्षित पुस्तक ’मेरी मुलाकातें’ का विधिवत विमोचन किया। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी बने, जिन्होंने राज्यपाल के साथ मिलकर इस कृति को सार्वजनिक किया। तकनीक के माध्यम से इस आयोजन की भव्यता तब और बढ़ गई जब केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्वनी वैष्णव ने ऑनलाइन जुड़कर इस साहित्यिक और पत्रकारिता जगत के उत्सव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने अपने संबोधन में पत्रकारिता के गिरते मूल्यों के दौर में इस पुस्तक को एक मशाल की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि श्री गोपाल शर्मा द्वारा संकलित ये साक्षात्कार मात्र प्रश्न-उत्तर नहीं, बल्कि समय के वे महती दस्तावेज हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनेंगे। राज्यपाल ने भावुक होते हुए पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ बिताए अपने संस्मरण साझा किए और रेखांकित किया कि पत्रकारिता में साक्षात्कार वही सार्थक होता है जहाँ साक्षात्कारकर्ता और साक्षात्कारदाता दोनों ही विषय की गहराई और सामयिक संदर्भों के मर्मज्ञ हों। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पुस्तक भारत निर्माण में योगदान देने वाली महान विभूतियों के अनछुए पहलुओं को उजागर करेगी और पाठकों को उन विशिष्ट व्यक्तित्वों को समझने का एक नया दृष्टिकोण प्रदान करेगी।
कार्यक्रम के दौरान पत्रकारिता के 'चौथे स्तंभ' की गरिमा पर प्रकाश डालते हुए श्री बागडे ने कहा कि भारतीय परंपरा में पत्रकारिता सदैव आदर्श मूल्यों और समाज के हित से जुड़ी रही है। उन्होंने श्री गोपाल शर्मा की लेखनी की सराहना करते हुए कहा कि इसमें पत्रकारिता के स्वस्थ मूल्यों के साथ-साथ साहित्य की गहरी संवेदनाएं समाहित हैं। विमोचन से पूर्व राज्यपाल ने पुस्तक के प्रमुख अंशों पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिसमें पत्रकारिता के स्वर्णिम काल की झलकियां दिखाई दीं। यह आयोजन न केवल एक पुस्तक का विमोचन था, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को सींचने वाले संवाद की महत्ता का एक जीवंत उद्घोष भी साबित हुआ, जो पत्रकारिता जगत और सुधि पाठकों के लिए लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।

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