जयपुर: क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में आत्मनिर्भर खेती और डिजिटल मिशन पर मंथन
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और सीएम भजनलाल शर्मा पश्चिम जोनल कॉन्फ्रेंस में तिलहन-दलहन आत्मनिर्भरता और सूक्ष्म सिंचाई की नई रणनीति साझा करेंगे।

राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर 7 अप्रैल, मंगलवार को एक ऐतिहासिक कृषि क्रांति की साक्षी बनने जा रही है। प्रदेश में कृषि क्षेत्र को नई दिशा प्रदान करने और बदलती जलवायु चुनौतियों के बीच "कृषि आत्मनिर्भरता, सतत विकास एवं डिजिटल कृषि" के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से पहली बार 'क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन: पश्चिम जोनल कॉन्फ्रेंस' का आयोजन किया जा रहा है। इस उच्च स्तरीय सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा शिरकत करेंगे। कार्यक्रम का गरिमामय शुभारंभ प्रातः 10:00 बजे राष्ट्रगान 'वंदे मातरम्' की गूँज के साथ होगा।
आयुक्त कृषि नरेश कुमार गोयल के अनुसार, इस कॉन्फ्रेन्स को न केवल नीतिगत बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी विशिष्ट बनाया गया है। अतिथियों का स्वागत सांगानेरी प्रिंट के पारंपरिक 'पटका' पहनाकर किया जाएगा, जो राजस्थान की वैश्विक हस्तशिल्प कला का प्रदर्शन करेगा। प्रधानमंत्री के 'श्री अन्न' (मिलेट्स) अभियान को केंद्र में रखते हुए आगंतुकों को उपहार स्वरूप मिलेट्स से निर्मित बिस्कुट, कुकीज, आम पापड़ और खाखरा जैसे उत्पाद भेंट किए जाएंगे। भोजन में भी प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखेगी, जिसमें विशेष रूप से बाजरे का चूरमा, मिलेट्स लड्डू, रागी हलवा और प्रसिद्ध दाल-बाटी-चूरमा परोसा जाएगा। इसके अतिरिक्त, अतिथियों को जयपुर की आध्यात्मिक पहचान गोविंद देव जी एवं काले हनुमान जी मंदिर के दर्शन भी कराए जाएंगे।
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी मंजू राजपाल 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' पहल के तहत राजस्थान की सफलता का खाका प्रस्तुत करेंगी। वर्तमान में राज्य के 99.28 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र में से 32.49 लाख हेक्टेयर सूक्ष्म सिंचाई के दायरे में है, जिसे शत-प्रतिशत करने का लक्ष्य है। राज्य सरकार द्वारा बूंद-बूंद सिंचाई, फव्वारा और मिनी स्प्रिंकलर जैसे संयंत्रों पर लघु, सीमांत, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं महिला कृषकों को 75 प्रतिशत तथा अन्य को 70 प्रतिशत तक का भारी अनुदान दिया जा रहा है।
इस महत्वपूर्ण मंथन में गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कृषि मंत्री एवं शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी सम्मिलित होंगे। चर्चा के केंद्र में 'राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन' के माध्यम से वर्ष 2030-31 तक आयात निर्भरता कम करना और 'दलहन आत्मनिर्भरता मिशन' के तहत तुअर, उड़द व मसूर की फसलों के लिए बीज विकास व सुनिश्चित खरीद तंत्र विकसित करना होगा। साथ ही, 'राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन' के तहत रसायन मुक्त कृषि और 'डिजिटल कृषि मिशन' (एग्री-स्टैक) के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व रिमोट सेंसिंग जैसी तकनीकों के एकीकरण पर विस्तृत रणनीति बनेगी। सम्मेलन में गुजरात के बागवानी नवाचार, महाराष्ट्र के एग्री-स्टैक प्रयोग और मध्य प्रदेश की उर्वरक वितरण प्रणाली जैसे सर्वोत्तम मॉडलों का भी आदान-प्रदान होगा। नकली कीटनाशकों पर लगाम और उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने जैसे कठोर विषयों पर विमर्श के पश्चात केंद्रीय कृषि मंत्री प्रेस वार्ता कर निष्कर्षों को साझा करेंगे। यह आयोजन भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक और प्रौद्योगिकी-आधारित बनाने की दिशा में एक निर्णायक मील का पत्थर साबित होगा।

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