जयपुर: रवींद्र मंच पर नाटक "ये लोग" का मंचन, समाज में बढ़ते अकेलेपन पर प्रहार
राजस्थान दिवस समारोह के तहत अनुपम रंग थिएटर सोसाइटी ने बुजुर्गों की उपेक्षा और पारिवारिक अलगाव की कड़वी सच्चाई को मंच पर जीवंत किया।

जयपुर। राजस्थान दिवस समारोह के अंतर्गत कला संस्कृति, साहित्य एवं पुरातत्व विभाग राजस्थान सरकार के सहयोग से अनुपम रंग थिएटर सोसाइटी की ओर से रवींद्र मंच पर नाटक "ये लोग" का सशक्त मंचन हुआ। विनोद कुमार द्वारा लिखित एवं वरिष्ठ रंगकर्मी के. के. कोहली द्वारा निर्देशित इस नाटक के माध्यम से यह मार्मिक संदेश दिया गया कि मनुष्य के जीवन में एक समय ऐसा भी आता है, जब वह भरे-पूरे परिवार के होते हुए भी अकेलेपन से ग्रसित हो जाता है।
अपनों के बीच परायापन और अनसुनी पीड़ा
नाटक की कहानी एक ऐसे बुजुर्ग के इर्द-गिर्द घूमती है जो नौकरी से रिटायर है। भरे-पूरे परिवार के होते हुए भी इस भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी में वह देखता है कि उसके लिए किसी के पास समय नहीं है। वह अपनी निरंतर होती उपेक्षा को देखकर समय व्यतीत करने के लिए एक पार्क में जाना शुरू करता है। वहां उसकी मुलाकात अकेलेपन से जूझ रहे एक छात्र नीलेश से होती है। संजीदा नीलेश बातचीत के दौरान बुजुर्ग को बताता है कि "उसके माता-पिता नौकरी-पेशे में इतने मशगूल हैं कि उसे समय नहीं दे पाते।" देखते ही देखते उन दोनों में एक गहरी और अच्छी दोस्ती हो जाती है।
समाज की कड़वी सच्चाई और मानवीय संघर्ष
पार्क में रोजाना दोनों की मुलाकातें होने लगती हैं और नीलेश की आकांक्षाएं जानकर बुजुर्ग आश्चर्य करता है। वहीं, एक फेरीवाला उसके साथ घटित घटनाओं की दुखभरी कहानी बुजुर्ग को सुनाता है, जिसे सुनकर वह यह सोचने को मजबूर हो जाता है कि ज़माने में सबके अपने गम हैं और आदमी उनसे जूझने के लिए कितना विवश है। उक्त नाटक में समाज की हकीकत को उजागर करने का प्रयास किया गया है कि इंसान जब बूढ़े हो जाते हैं तो वे किसी काम के नहीं रहते। वह नौकरी से ही नहीं बल्कि समाज और परिवार से भी रिटायर कर दिए जाते हैं और सिर्फ भटकने के लिए छोड़ दिए जाते हैं।
सजीव अभिनय और तकनीकी पक्ष
मंच पर कलाकारों के जीवंत प्रदर्शन ने दर्शकों को बांधे रखा। नाटक में महेश महावर, जॉर्ज ग्रोवर, डी. पी. मंडावरा, भगवती, जागृति महावर, मनीषा बैरवा और के. के. कोहली ने प्रभावी अभिनय किया। नाटक की सफलता में इसके तकनीकी पक्ष का भी बड़ा योगदान रहा, जहाँ प्रकाश परिकल्पना एवं संचालन शहज़ोर अली द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया।

Pratahkal Bureau
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