जयपुर रेल मंडल की पहल: 55 महिलाओं को रोजगार और यात्रियों को स्वच्छता
उत्तर पश्चिम रेलवे ने जयपुर के करतारपुरा में अत्याधुनिक लॉन्ड्री स्थापित की, जहां एआई तकनीक और भाप आधारित धुलाई से बेडरोल की स्वच्छता सुनिश्चित की जा रही है।

जयपुर के करतारपुरा स्थित अत्याधुनिक मशीनीकृत लॉन्ड्री में कार्यरत महिला कर्मचारी, जहाँ प्रतिदिन 15 टन रेल लिनेन की धुलाई और एआई आधारित एलआईएसए प्रणाली से जांच की जाती है।
उत्तर पश्चिम रेलवे का प्रमुख जयपुर मंडल यात्रियों को स्वच्छ और स्वास्थ्यकर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के साथ आगे बढ़ा है। प्रतिदिन लगभग 128 ट्रेनों के आवागमन और जयपुर स्टेशन से 30 से अधिक ट्रेनों के संचालन के बीच मंडल ने खातीपुरा में अत्याधुनिक रखरखाव सुविधाओं के विकास की व्यापक योजना तैयार की है, जिसके शीघ्र चालू होने की संभावना है।
यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने में अग्रणी रहे जयपुर मंडल ने स्वच्छ चादरें उपलब्ध कराने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसी क्रम में हाल ही में जयपुर मंडल भारतीय रेलवे का पहला मंडल बना, जिसने ट्रेन संख्या 12981/12982 (जयपुर-असारवा-जयपुर) के सभी एसी कोच यात्रियों को कंबल कवर उपलब्ध कराए। इस पहल का उद्घाटन माननीय रेल मंत्री द्वारा किया गया, जिसे यात्रियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इसके आधार पर न्यू जलपाईगुड़ी से हावड़ा के बीच संचालित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में भी सभी कोचों में कंबल कवर उपलब्ध कराए गए हैं।
प्रत्येक एसी कोच यात्री को दो बेडशीट, एक फेस टॉवल, एक पिलो कवर, एक कंबल और एक तकिया सहित बेडरोल किट प्रदान किया जाता है। रेलवे प्रत्येक यात्रा के बाद इन सभी वस्तुओं की धुलाई सुनिश्चित करता है। भाप आधारित धुलाई प्रक्रिया के माध्यम से कपड़ों की गहन सफाई और प्रभावी कीटाणुशोधन किया जाता है, जिससे रोगाणु और जीवाणु नष्ट होते हैं और उच्चतम स्वच्छता मानक सुनिश्चित होते हैं।
इस सुविधा के संचालन हेतु जयपुर के करतारपुरा में लगभग 15 टन प्रतिदिन क्षमता वाली अत्याधुनिक मशीनीकृत लॉन्ड्री स्थापित की गई है। यहां 16 स्वचालित वाशिंग मशीन, स्वचालित फोल्डर युक्त 5 कैलेंडरिंग मशीनें, 5 ड्रायर, वाटर सॉफ्टनर, एयर कंप्रेसर, बॉयलर और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध हैं। धुलाई के बाद लिनेन को एआई आधारित लिनेन निरीक्षण और छंटाई सहायता प्रणाली (एलआईएसए) से गुजारा जाता है, जो गंदे और दागदार कपड़ों की स्वचालित पहचान और छंटाई करती है।
जयपुर मंडल ने नई पहल के तहत जयपुर से गुजरने वाली सभी ट्रेनों के एसी कोच यात्रियों को कंबल कवर उपलब्ध कराने की योजना बनाई है, जिससे लॉन्ड्री कार्य में वृद्धि होगी। स्वच्छता और पर्यावरणीय मानकों के पालन के लिए भाप आधारित धुलाई, जैव अपघटनीय डिटर्जेंट का उपयोग, रसायनों का नियंत्रित प्रयोग, उन्नत मशीनरी और चादरों की मशीनीकृत तह जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
पर्यावरण संरक्षण के तहत अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (ईटीपी) स्थापित किया गया है तथा उपचारित जल के पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग की योजना अपनाई गई है। ऊर्जा-कुशल बॉयलरों का नियमित रखरखाव, 100 फीट ऊंची चिमनी के माध्यम से नियंत्रित उत्सर्जन, वायु की नियमित जांच और धूल संग्राहकों की स्थापना भी सुनिश्चित की गई है। इस परियोजना से लगभग 55 महिलाओं को रोजगार मिला है, जिनमें अधिकांश स्थानीय क्षेत्र की हैं, जिससे महिला सशक्तिकरण और स्थानीय आजीविका को बल मिला है।
करतारपुरा स्थित यह रेलवे लॉन्ड्री यात्रियों को स्वच्छ और स्वास्थ्यकर कपड़े उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आधुनिक तकनीक, भाप आधारित स्वच्छता और पर्यावरणीय संतुलन पर केंद्रित यह पहल भारतीय रेलवे की जिम्मेदार और यात्री-केंद्रित कार्यप्रणाली का सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है।

Pratahkal Bureau
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