जयपुर में ‘पावर फॉर टुमॉरो’ कार्यशाला, सौर ऊर्जा से युवाओं के लिए लाखों रोजगार की उम्मीद
जयपुर में ‘पावर फॉर टुमॉरो’ कार्यशाला में सौर ऊर्जा, रोजगार, राजस्थान की अक्षय ऊर्जा क्षमता और एसजेवीएन की योजनाओं पर चर्चा हुई।

तस्वीर में जयपुर में आयोजित 'पावर फॉर टुमॉरो' कार्यशाला के दौरान अतिथि और प्रतिभागी युवा नजर आ रहे हैं।
जयपुर में युवाओं को सौर ऊर्जा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) एवं आइकोनिक्स ब्रॉडकास्टिंग की ओर से ‘पावर फॉर टुमॉरो’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में शोध, रोजगार की संभावनाओं, राजस्थान की अक्षय ऊर्जा क्षमता और ऊर्जा संरक्षण को लेकर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए श्री अजय असवाल (आईएएस), निदेशक, शांति एवं अहिंसा विभाग, राजस्थान सरकार ने कहा कि रोजमर्रा के जीवन में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में किए जा रहे शोध का लाभ लेने के लिए जरूरी है कि सभी लोग इसके बारे में जागरूकता फैलाने में अपनी भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भविष्य में लाखों रोजगार के अवसर पैदा होने वाले हैं, जिससे युवाओं को लाभ होगा।
श्री नितिन अग्रवाल, सीईओ, राजस्थान सोलर एसोसिएशन ने कहा कि राजस्थान में 50 गीगावाट अक्षय ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है और भविष्य में राजस्थान अक्षय ऊर्जा के कुल उत्पादन में 25 प्रतिशत की भागीदारी निभाएगा। उन्होंने बताया कि ‘राइजिंग राजस्थान’ के दौरान हुए 35 लाख करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों में 80 प्रतिशत निवेश अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में आएगा।
श्री अग्रवाल ने बताया कि राजस्थान में फ्लैट्स की बालकनियों में भी सौर ऊर्जा प्रणाली लगाने का पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा है। इससे लोगों को 2 और 3 किलोवाट की सौर ऊर्जा प्रणालियां लगाने की अनुमति मिलेगी, जिससे उन्हें 25 वर्षों तक सौर ऊर्जा से बिजली मिलेगी। इसके साथ ही राज्य में फ्लैट और सोसायटी भी किसी अन्य स्थान पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगा सकते हैं, जिससे उन्हें बिजली के बिल में रियायत दी जाएगी।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार श्री अनिल चतुर्वेदी ने बताया कि एसजेवीएन ने राजस्थान में 1 अरब यूनिट से अधिक हरित बिजली पैदा करने का रिकॉर्ड बनाया है। कंपनी के बीकानेर प्रोजेक्ट ने यह रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने बताया कि एसजेवीएन राजस्थान को देश का सौर ऊर्जा केंद्र मानते हुए यहां अपने कार्यों का विस्तार दे रही है और राजस्थान में अगले कुछ वर्षों में 10 हजार मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा पार्क और विद्युत परियोजना विकसित करेगी।
इसके साथ ही एसजेवीएन के बड़े जलाशयों में तैरते सौर ऊर्जा संयंत्र तथा राज्य की तेज हवाओं का लाभ उठाने के लिए पवन-सौर हाइब्रिड परियोजनाओं के लिए भी सर्वेक्षण और व्यवहार्यता अध्ययन किए जा रहे हैं।
कार्यशाला को शिक्षाविद् एवं सौर ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ. अलका त्रिपाठी, डॉ. ए.के. श्रीवास्तव और डॉ. मुकेश शर्मा ने भी संबोधित किया। राजस्थान फिलाटेलिक सोसायटी के महासचिव राजेश पहाड़िया ने डाक टिकटों के माध्यम से सौर ऊर्जा और ऊर्जा संरक्षण के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों और छात्राओं ने ऊर्जा संरक्षण को लेकर शपथ ली। इस अवसर पर ‘सौर ऊर्जा का भविष्य’ विषय पर आयोजित चित्रकला, भाषण और नारा लेखन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार दिए गए। कार्यशाला में सौर ऊर्जा के प्रति जागरूकता, भविष्य के रोजगार अवसर और ऊर्जा संरक्षण को लेकर युवाओं की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया।

