जयपुर: अंबेडकर पीठ को लेकर छिड़ा सियासी घमासान, मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आरोपों को नकारा
जयपुर में अंबेडकर पीठ के कार्यकाल को लेकर मचे राजनीतिक घमासान के बीच उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है। डॉ. बैरवा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस शासन के दौरान ही पीठ का एमओयू समाप्त हो गया था। राजस्थान विश्वविद्यालय में बाबा साहेब के विजन को आगे बढ़ाने के लिए अंबेडकर सेंटर, पुस्तकालय और छात्रावास सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं।

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में इन दिनों संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर स्थापित 'अंबेडकर पीठ' को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने इस संबंध में प्रसारित हो रही खबरों और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा उठाए गए सवालों पर कड़ा पलटवार करते हुए वास्तविक तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट की है। डॉ. बैरवा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अंबेडकर पीठ के संचालन को लेकर फैलाए जा रहे दावे न केवल आधारहीन हैं, बल्कि यह जनता के बीच भ्रम पैदा करने का एक प्रयास मात्र हैं।
इस पूरे विवाद की जड़ें इतिहास और आधिकारिक समझौतों (MoU) से जुड़ी हैं। मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने आधिकारिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि राजस्थान विश्वविद्यालय में अंबेडकर पीठ की स्थापना वर्ष 2016 में की गई थी। यह पीठ भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधीन अंबेडकर फाउंडेशन और राजस्थान विश्वविद्यालय के बीच हुए एक एमओयू के तहत अस्तित्व में आई थी। 12 अप्रैल 2016 को प्रभावी हुआ यह समझौता केवल पांच वर्षों के लिए था, जिसकी समय सीमा वर्ष 2021 में ही समाप्त हो चुकी थी।
मंत्री बैरवा ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिस समय इस पीठ का कार्यकाल समाप्त हुआ, उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री को उस वक्त इस एमओयू को आगे बढ़ाने की चिंता करनी चाहिए थी, न कि अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर भ्रम फैलाना चाहिए। डॉ. बैरवा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान दिखाई गई उदासीनता और प्रशासनिक लापरवाही के कारण ही इस पीठ को मिलने वाला निर्धारित वित्तीय अनुदान कभी भी पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं हो सका। उन्होंने गहलोत से इस लापरवाही पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
अंबेडकर पीठ के भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उच्च शिक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालय में चल रही अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने आश्वस्त किया कि राजस्थान विश्वविद्यालय में बाबा साहेब के विजन और उनके महान योगदान को संरक्षित करने के लिए 'अंबेडकर सेंटर' पूरी सक्रियता के साथ संचालित है। इस केंद्र के माध्यम से महापरिनिर्वाण दिवस और संविधान दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर विभिन्न शैक्षणिक और शोध गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं, ताकि युवा पीढ़ी डॉ. अंबेडकर के आदर्शों से जुड़ सके।
विश्वविद्यालय परिसर की शैक्षणिक विरासत का उल्लेख करते हुए डॉ. बैरवा ने बताया कि वहां वर्तमान में डॉ. बी. आर. अंबेडकर पुस्तकालय और अंबेडकर छात्रावास भी सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा, 'सेंटर फॉर अंबेडकर स्टडीज' के माध्यम से निरंतर शोध कार्य जारी हैं और बाबा साहेब के सम्मान में परिसर में दो प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। यह स्पष्ट करता है कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन संविधान निर्माता के प्रति पूरी श्रद्धा और जिम्मेदारी के साथ काम कर रहे हैं। यह राजनीतिक विवाद न केवल प्रशासनिक खींचतान को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि महापुरुषों की विरासत को लेकर प्रदेश की राजनीति कितनी संवेदनशील है।

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