जयपुर में कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस मुख्यालय में हुई अहम समीक्षा बैठक में महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अपराध नियंत्रण, लंबित मामलों के निस्तारण और संवेदनशील घटनाओं पर कार्रवाई में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने विवादित मामलों की विशेष निगरानी, नाकाबंदी के दौरान बॉडी कैमरों के उपयोग, साइबर अपराधों में जीरो एफआईआर दर्ज करने और आगामी पंचायती राज चुनावों के लिए पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

बुधवार, 14 अक्टूबर को पुलिस मुख्यालय में आयोजित अपराध एवं कानून-व्यवस्था समीक्षा बैठक में लंबित प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण, अपराधों की रोकथाम, संवेदनशील घटनाओं की निगरानी, आगामी पंचायती राज चुनावों की तैयारियों और पुलिसकर्मियों के आचरण सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की विस्तृत समीक्षा की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में सभी रेंज के पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस जिलों के पुलिस अधीक्षक जुड़े, जबकि पुलिस मुख्यालय में समस्त अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

राजीव कुमार शर्मा ने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका पैदा करने वाले विवादित मामलों को प्राथमिकता से चिह्नित करने के निर्देश दिए। ऐसे मामलों की सूची तैयार कर नियमित निगरानी करने तथा थाना, वृत्त और जिला स्तर पर उनकी समीक्षा करने को कहा गया। उन्होंने राजस्व, वन विभाग सहित संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर समय रहते आवश्यक कार्रवाई करने पर जोर दिया। विवादों को गंभीर रूप लेने से पहले नियंत्रित करने के लिए समझाइश, निरोधात्मक कार्रवाई और अन्य वैधानिक उपाय अपनाने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में पुलिसकर्मियों की अपराधों में संलिप्तता के मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कार्मिकों की पहचान, निगरानी और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस थानों और फील्ड में तैनात पुलिसकर्मियों का व्यवहार आमजन के प्रति संवेदनशील, सौहार्दपूर्ण और सहयोगात्मक होना चाहिए। परिवादियों की नियमित सुनवाई कर उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए।

हाल के दिनों में हुई विभिन्न घटनाओं की समीक्षा करते हुए डीजीपी ने संवेदनशील और गंभीर मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभावी पर्यवेक्षण सुनिश्चित करने के लिए कहा। ऐसी घटनाओं की सूचना तत्काल उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने, तथ्यों के आधार पर त्वरित एवं समुचित कार्रवाई करने तथा प्रेस और सोशल मीडिया के माध्यम से समय पर तथ्यपरक जानकारी साझा करने पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और जिम्मेदारी निर्धारित कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस थानों में लंबित प्रकरणों के निस्तारण को लेकर जवाबदेही तय करने के निर्देश देते हुए राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि एक वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों की समीक्षा संबंधित पुलिस अधीक्षक करेंगे, जबकि तीन वर्ष से अधिक अवधि से लंबित मामलों की समीक्षा संबंधित रेंज आईजी करेंगे। पुराने मुकदमों के साथ लंबित चालान और अंतिम रिपोर्ट (एफआर) के निस्तारण के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने को कहा गया। लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा कर उनके निस्तारण में आ रही बाधाओं को दूर करने के निर्देश भी दिए गए।

अपराध के आंकड़ों की समीक्षा के दौरान डीजीपी ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) एवं भारतीय दंड संहिता (भादंसं) के तहत दर्ज प्रकरणों में पांच प्रतिशत से अधिक वृद्धि वाले जिलों को अपराधों का विश्लेषण कर प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। एनडीपीएस एक्ट के तहत अपेक्षाकृत कम प्रकरण दर्ज करने वाले जिलों को मादक पदार्थों के विरुद्ध सक्रियता बढ़ाकर प्रभावी कार्रवाई करने को कहा गया। महिला अत्याचार से संबंधित मामलों में अधिक वृद्धि वाले जिलों को इसके कारणों का विश्लेषण कर ठोस एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए। स्थानीय एवं विशेष अधिनियमों तथा एनडीपीएस एक्ट के तहत न्यूनतम कार्रवाई वाले जिलों की समीक्षा करते हुए अपेक्षित सुधार सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

आगामी पंचायती राज चुनावों और पर्व-त्योहारों के मद्देनजर सभी जिलों को आवश्यक पुलिस बल की तैनाती के लिए कार्ययोजना तैयार करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। असामाजिक तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध निरोधात्मक कार्रवाई करने, नियमित गश्त बढ़ाने और प्रभावी नाकाबंदी सुनिश्चित करने को कहा गया। आगामी पर्व-त्योहारों के दौरान पुलिस की सक्रिय उपस्थिति बनाए रखने और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी करने पर भी जोर दिया गया।

डीजीपी ने पर्व-त्योहारों के दौरान कालिका पेट्रोलिंग यूनिट की फील्ड में उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था पर निरंतर नजर रखने और आमजन की सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही तथा जनता के विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

नाकाबंदी के दौरान पारदर्शिता और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए पुलिसकर्मियों को बॉडी कैमरों का उपयोग करने के निर्देश दिए गए। शराब पीकर वाहन चलाने वालों, संदिग्ध वाहनों और तेज गति से वाहन चलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने को कहा गया। अपराध की सूचना मिलते ही पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम न्यूनतम रखने और घटनास्थल पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

अपराधों की रोकथाम के लिए डीजीपी ने निरोधात्मक एवं प्रो-एक्टिव पुलिसिंग को मजबूत करने पर जोर दिया। इसके तहत राजस्थान प्रिवेंशन ऑफ डेंजरस एक्टिविटीज (राजपासा), बीएनएस की संबंधित धाराओं, गुंडा एक्ट और एनडीपीएस से संबंधित निरोधात्मक प्रावधानों सहित अन्य वैधानिक उपायों का प्रभावी उपयोग करने को कहा गया। साइबर अपराधों के मामलों में जीरो एफआईआर दर्ज कर अधिकाधिक पीड़ितों को राहत पहुंचाने और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में अपराध नियंत्रण से लेकर लंबित मामलों की जवाबदेही, संवेदनशील घटनाओं की निगरानी, यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई और आगामी पंचायती राज चुनावों की सुरक्षा तैयारियों तक सभी प्रमुख पहलुओं की समीक्षा की गई। डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की निरंतर निगरानी करते हुए आमजन की सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही और जनता के विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।


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