जयपुर में 16 राज्यों के 140 प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार के वैलिडेशन एक्ट 2025 के विरुद्ध एकजुट होकर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक पेंशन अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में आल इंडिया स्टेट पेंशनर्स फेडरेशन के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का ऐतिहासिक आगाज हुआ, जिसने केंद्र सरकार के 'वैलिडेशन एक्ट' के विरुद्ध एक देशव्यापी संघर्ष की आधारशिला रख दी है। राजस्थान पेंशनर समाज की मेजबानी में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, जम्मू कश्मीर, बिहार, कर्नाटक, असम और हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के पेंशनर संघों के 140 प्रतिनिधियों ने शिरकत कर अपनी एकजुटता का परिचय दिया। सम्मेलन के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष पी के शर्मा, संस्थापक चेयरमैन एस एस दुबे, राष्ट्रीय महामंत्री डी सुधाकर और राजस्थान पेंशनर समाज के प्रदेश अध्यक्ष शंकर सिंह मनोहर सहित अन्य पदाधिकारियों ने केंद्र द्वारा पारित वैलिडिटी एक्ट पर गहरा रोष प्रकट करते हुए स्पष्ट किया कि अब पेंशनरों के अधिकारों की रक्षा हेतु आंदोलनात्मक रुख अपनाना अनिवार्य हो गया है।

स्वागत उद्बोधन में प्रदेश अध्यक्ष शंकर सिंह मनोहर ने राजस्थान के पेंशनर समाज को देश का सबसे सक्रिय और मजबूत संगठन बताते हुए घोषणा की कि वैलिडेशन एक्ट के विरोध में किसी भी आंदोलन का नेतृत्व करने में राजस्थान अग्रणी भूमिका निभाएगा। वक्ताओं ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए रेखांकित किया कि डी एस नाकरा केस में 17 दिसंबर 1982 को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने पेंशनरों को जो मौलिक अधिकार प्रदान किए थे, उन्हें सरकार ने 'वैलिडेशन एक्ट 2025' के माध्यम से छीनने का प्रयास किया है, जिसका प्रतिकार करना न्यायसंगत है। सम्मेलन के दूसरे दिन संयुक्त बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा ने पेंशनरों को समाज की 'चलती-फिरती पुस्तक' की संज्ञा देते हुए उनकी चिकित्सा और अन्य प्रादेशिक समस्याओं के समाधान हेतु मुख्यमंत्री से चर्चा करने का आश्वासन दिया।

समारोह की अध्यक्षता कर रही सांसद श्रीमती मंजू शर्मा ने पेंशनरों की भावनाओं के अनुरूप केंद्रीय वित्त मंत्री से संवाद कर इस अधिनियम का समुचित समाधान निकालने का भरोसा दिलाया। इस अवसर पर विधायक गोपाल शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष डोरी लाल शर्मा और शंकर सिंह मनोहर ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों द्वारा प्रदेश स्तरीय स्मारिका का विमोचन किया गया, जबकि दूसरे सत्र में राजस्थान के सभी जिलाध्यक्षों ने धरातलीय समस्याओं को विस्तार से सदन के समक्ष रखा। प्रदेश महामंत्री किशन शर्मा द्वारा जारी यह विज्ञप्ति पेंशनर समाज के संघर्ष और उनके अधिकारों की रक्षा के संकल्प को प्रतिबिंबित करती है।


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