जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित राजभवन सोमवार को उस समय वैचारिक विमर्श का केंद्र बन गया, जब भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने राज्यपाल हरिभाऊ बागडे से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात ने न केवल राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट पैदा की, बल्कि एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन दर्शन को आधुनिक संदर्भों में पुनर्जीवित करने का एक सशक्त माध्यम भी बनी। राजभवन के लोकभवन में आयोजित इस गरिमामयी मुलाकात के दौरान डॉ. विजय विप्लवी ने राज्यपाल को अपनी और डॉ. कुंजन आचार्य द्वारा सह-लिखित विशेष पुस्तक 'पत्रकार दीनदयाल उपाध्याय' की प्रति सप्रेम भेंट की।

इस भेंट के दौरान वातावरण तब और अधिक प्रगाढ़ हो गया जब राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी और डॉ. विप्लवी के बीच पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन के अनछुए पहलुओं और उनके संस्मरणों पर विस्तृत चर्चा शुरू हुई। चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु उपाध्याय जी का पत्रकारिता के प्रति समर्पण और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सूचना पहुँचाने का उनका संकल्प रहा। डॉ. विप्लवी ने राज्यपाल को पंडित दीनदयाल उपाध्याय से संबंधित साहित्य के आगामी और प्रस्तावित प्रकाशनों की रूपरेखा से भी अवगत कराया, जिस पर राज्यपाल ने सकारात्मक रुचि दिखाई।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर उदयपुर के प्रसिद्ध समाजसेवी अशोक बाबेल भी उपस्थित रहे, जिन्होंने सामाजिक सरोकारों और वैचारिक साहित्य के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया। यह मुलाकात केवल एक औपचारिक भेंट तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने राजस्थान की बौद्धिक विरासत और राजनीतिक मूल्यों के अंतर्संबंधों को नई गहराई प्रदान की। एक वरिष्ठ राजनेता, एक अनुभवी पार्षद और एक लेखक का राज्यपाल के साथ इस प्रकार का संवाद यह दर्शाता है कि भविष्य की राजनीति में वैचारिक साहित्य और ऐतिहासिक विभूतियों का मार्गदर्शन कितना अपरिहार्य है।

Pratahkal Bureau

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