जयपुर की सड़कों पर जब उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबन्धक श्री अमिताभ ने हरी झण्डी दिखाकर एक वाहन को रवाना किया, तो वह केवल राशन का ट्रक नहीं, बल्कि हजारों रेलकर्मियों की संवेदनाओं का कारवां था। उत्तर पश्चिम रेलवे के कर्मचारियों ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि वे केवल पटरियों पर देश को गति ही नहीं देते, बल्कि समाज के प्रति अपने मानवीय दायित्वों का निर्वहन करने में भी सबसे आगे रहते हैं। गुरुवार को मुख्यालय से रवाना हुई खाद्य सामग्री की यह खेप उन निराश्रितों और निशक्तजनों के चेहरों पर मुस्कान लाने का माध्यम बनेगी, जो समाज की मुख्यधारा से दूर कठिन जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

इस सेवा कार्य का आयोजन उत्तर पश्चिम रेलवे के रेलकर्मियों द्वारा संचालित संस्था ‘पल्लव-एक उम्मीद’ के तत्वाधान में किया गया। मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री शशि किरण ने जानकारी देते हुए बताया कि यह संस्था कर्मचारियों की एकजुटता और लोक कल्याण की भावना का प्रतीक है। महाप्रबन्धक श्री अमिताभ ने इस अवसर पर रेलकर्मियों के प्रयासों की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा पुनीत कार्य है और समाज के हर सक्षम व्यक्ति को ऐसे नेक कार्यों में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी चाहिए। उनके अनुसार, इस पहल का उद्देश्य उन लोगों की सहायता करना है जो शारीरिक रूप से अक्षम हैं या जिन्हें अपनों ने त्याग दिया है।

इस अभियान के तहत लगभग 3 लाख रुपये मूल्य की विशाल खाद्य सामग्री एकत्रित की गई, जिसे जयपुर और आसपास के विभिन्न सेवा केंद्रों तक पहुँचाया गया। इसमें अपना घर आश्रम (बस्सी), नेत्रहीन संस्थान, पतित पावन सेवा समिति और नया सवेरा जैसी महत्वपूर्ण संस्थाएं शामिल हैं। दान की गई सामग्री की सूची रेलकर्मियों की व्यापक सोच को दर्शाती है, जिसमें 3 टन चावल, 100 किलोग्राम आटा, 500 किलोग्राम दाल, 500 किलोग्राम चीनी, 150 किलोग्राम पोहा, 100 किलोग्राम तेल, 40 किलोग्राम मसाले और 10 किलोग्राम चाय पत्ती जैसे आवश्यक राशन शामिल थे।

कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के लिए मुख्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी वहां मौजूद रहे। महाप्रबन्धक के साथ प्रमुख वित्त सलाहकार सुश्री गीतिका पाण्डेय और प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी श्री प्रदीप कुमार सिंह ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। साथ ही विभिन्न मान्यताप्राप्त संगठनों के प्रतिनिधिगण और बड़ी संख्या में रेल कर्मचारी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। यह आयोजन केवल एक दान प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह उत्तर पश्चिम रेलवे के उस संगठित ढांचे की शक्ति थी, जो तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी उतनी ही प्राथमिकता देता है। अंततः, यह पहल समाज में एक गहरा सकारात्मक प्रभाव छोड़ने और अन्य संगठनों को प्रेरित करने के ध्येय के साथ संपन्न हुई।

Pratahkal Bureau

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