जयपुर: महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में 'गुजरा हुआ जमाना' संगीत संध्या आयोजित
पद्म भूषण पंडित विश्वमोहन भट्ट की उपस्थिति में कलाकारों ने सदाबहार गीतों की प्रस्तुति दी, आयोजन डॉ. प्रकाश छबलानी द्वारा निर्देशित था।

जयपुर के महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में आयोजित 'गुजरा हुआ जमाना' संगीत संध्या के दौरान मंच पर प्रस्तुति देते गायक कलाकार। इस कार्यक्रम में शहर के प्रतिष्ठित गायकों ने पुराने दौर के कालजयी गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जयपुर। गुलाबी नगरी में आयोजित ‘गुजरा हुआ जमाना – आता नहीं दोबारा’ संगीत संध्या ने महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम को सुरों की रोशनी से सराबोर कर दिया। जैसे ही शाम ढली, जयपुर एक ऐसी संगीतमय यात्रा का गवाह बना जहाँ हर धुन में पुरानी यादें और हर गीत में गहरा एहसास समाहित था। संगीत प्रेमियों से खचाखच भरे सभागार में तालियों की गूंज और सुरीली गुनगुनाहट का यह सिलसिला देर रात तक निर्बाध रूप से चलता रहा।
इस विशिष्ट आयोजन की गरिमा ग्रैमी अवॉर्ड विजेता एवं पद्म भूषण से सम्मानित पंडित विश्वमोहन भट्ट की उपस्थिति से और अधिक बढ़ गई। डॉ. प्रकाश छबलानी की परिकल्पना से सजे इस कार्यक्रम ने जयपुर की समृद्ध संगीत परंपरा को एक जीवंत उत्सव का स्वरूप प्रदान किया। समारोह का भावपूर्ण आगाज़ हाल ही में दिवंगत हुईं महान गायिका आशा भोंसले के सम्मान में भजन 'तुम्हारा मन दर्पण हो जाए' की प्रस्तुति के साथ हुआ, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
मंच पर जब एक के बाद एक कालजयी धुनें बिखरीं, तो श्रोता बीते दौर की यादों में खो गए। ‘ना मुँह छुपा के जियो’ की आत्मीयता और ‘जाने वो कैसे लोग थे’ की संवेदनशीलता ने जहाँ दर्शकों को भावुक किया, वहीं ‘मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया’ की बेफिक्री, ‘एक प्यार का नगमा है’ की दार्शनिक गहराई और ‘गुलाबी आँखें’ की चंचलता ने माहौल में नया उत्साह भर दिया। आधुनिक क्लासिक्स जैसे ‘तुम मिले दिल खिले’, ‘लाल इश्क’ और ‘होश वालों को खबर क्या’ की प्रस्तुतियों ने नई पीढ़ी के संगीत को भी उसी खूबसूरती से पिरोया। शहर के प्रतिष्ठित कलाकारों—प्रो. डॉ. सुमन यादव, संजय रायज़ादा, सुमंत मुखर्जी, ममता झा, सोनिया बिरला, सुप्रिया केसवानी, के.के. एवं रजनी ठाकुर, विक्रम सिंह, सुनील शर्मा, यशवर्धन सिंह, गरिमा वर्मा और डॉ. बबीता—ने अपनी सुरीली आवाज़ और जीवंत प्रस्तुतियों से इस शाम को अविस्मरणीय बना दिया। मंच का कुशल संचालन शिल्पा, वेदिका और वर्णिका परवानी द्वारा किया गया।
आयोजकों ने इस शाम को केवल एक संगीत कार्यक्रम न मानकर एहसासों का उत्सव करार दिया, जिसने पुराने दौर की मधुरता और वर्तमान की ताजगी का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। जयपुर की इस संगीतमय शाम ने एक बार फिर यह प्रमाणित कर दिया कि यह शहर केवल अपने स्थापत्य के लिए ही नहीं, बल्कि सुरों की गहराई और संगीत की आत्मा के संरक्षण के लिए भी अद्वितीय है।

