जयपुर। गुलाबी नगरी की व्यस्त सड़कों और रफ्तार भरते हाइवे को बेसहारा पशुओं से मुक्त कराने के लिए नगर निगम जयपुर ने गुरुवार को एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है। शहर के प्रवेश द्वारों और प्रमुख राजमार्गों पर काल का ग्रास बन रहे निराश्रित गौवंश को बचाने के लिए निगम की टीम ने अलसुबह से ही मोर्चा संभाल लिया। नगर निगम जयपुर के पशु प्रबंधन अनुभाग की इस कार्रवाई ने न केवल यातायात को सुगम बनाया है, बल्कि सड़कों पर असुरक्षित घूम रहे गौवंश को एक सुरक्षित छत भी प्रदान की है। इस सघन अभियान के दौरान सीकर रोड, आगरा रोड और टोंक-कोटा रोड जैसे प्रमुख मार्गों से कुल 86 बेसहारा गौवंश को रेस्क्यू कर सुरक्षित रूप से हिंगोनिया गौ-पुनर्वास केंद्र पहुंचाया गया।

यह पूरी कार्रवाई आयुक्त डॉ. गौरव सैनी के कड़े निर्देशों के बाद अमल में लाई गई। इस ऑपरेशन को धरातल पर उतारने का जिम्मा उपायुक्त सीमा शर्मा के नेतृत्व में गठित एक विशेष टीम को सौंपा गया था। टीम में शामिल पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. योगेश शर्मा और डॉ. राकेश कलोरिया ने पूरे क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया और एन.एच.ए.आई. (NHAI) के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए एक-एक कर सड़कों के बीच बैठे और घूम रहे गौवंश को कुशलतापूर्वक पकड़वाया। सड़कों पर बढ़ते हादसों और आवारा पशुओं की समस्या को देखते हुए यह कार्रवाई अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी, जिसे प्रशासनिक सूझबूझ से सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

इस महत्वपूर्ण अभियान के पीछे माननीय उच्चतम न्यायालय के कड़े रुख और न्यायिक आदेशों की अनुपालना का मुख्य आधार रहा है। उपायुक्त सीमा शर्मा ने बताया कि नई दिल्ली स्थित माननीय उच्चतम न्यायालय में दायर सुओ मोटो रिट पिटीशन सिविल संख्या 05/25, जिसका शीर्षक 'city hounded by strays kids pay price' है, में दिए गए निर्देशों की अक्षरशः पालना सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। न्यायालय ने आवारा पशुओं के कारण होने वाली जनहानि और अव्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। इसी को ध्यान में रखते हुए जयपुर नगर निगम ने एन.एच.ए.आई. के साथ मिलकर राजमार्गों पर विशेष फोकस किया ताकि तेज रफ्तार वाहनों के बीच गौवंश की जान को खतरा न रहे और राहगीर भी सुरक्षित सफर कर सकें।

नगर निगम की इस व्यापक कार्रवाई से शहरवासियों और वाहन चालकों ने राहत की सांस ली है। पकड़े गए सभी 86 गौवंश को व्यवस्थित तरीके से हिंगोनिया गौ-पुनर्वास केंद्र भेजा गया है, जहां उनके चारे और स्वास्थ्य की उचित देखभाल की जाएगी। निगम प्रशासन का यह कड़ा रुख स्पष्ट संकेत देता है कि आने वाले दिनों में शहर की सड़कों को आवारा पशु मुक्त बनाने के लिए ऐसे अभियान और भी तेजी से चलाए जाएंगे। सड़कों से गौवंश का यह विस्थापन न केवल प्रशासनिक सफलता है, बल्कि जीव दया और नागरिक सुरक्षा की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

Pratahkal Newsroom

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