जयपुर। गुलाबी नगरी के विकास को गति देने और राजस्व संग्रहण को पुख्ता करने के लिए नगर निगम जयपुर अब पूरी तरह से 'अलर्ट मोड' पर आ गया है। शहर में लंबे समय से लंबित नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) की वसूली के लिए निगम प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। नगर निगम जयपुर के आयुक्त डॉ. गौरव सैनी के सीधे निर्देशानुसार, बुधवार को विभिन्न जोनों में बकाया करदाताओं के खिलाफ बड़े स्तर पर धरपकड़ और जब्ती की कार्रवाई को अंजाम दिया गया, जिसने बड़े बकायदारों के बीच हड़कंप मचा दिया है।

इस अभियान की मुख्य धमक सिविल लाइंस जोन में देखने को मिली, जहां जोन उपायुक्त लक्ष्मीकांत कटारा के नेतृत्व में राजस्व और प्रशासनिक विभाग की संयुक्त टीम ने मोर्चा संभाला। कार्रवाई इतनी सघन थी कि टीम ने सीधे संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया शुरू कर दी। उपायुक्त लक्ष्मीकांत कटारा ने बताया कि कार्रवाई के दौरान टीम ने दो प्रमुख संपत्तियों की कुर्की की। वहीं, निगम की इस सख्ती को देख अन्य चार प्रकरणों में बकायदारों ने कार्रवाई के बीच ही समझाइश के दौरान हथियार डाल दिए और मौके पर ही 11,71,998 रुपये का बकाया कर जमा कराया।

निगम का यह शिकंजा केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। झोटवाड़ा और वैशाली नगर जोन में भी राजस्व शाखा ने अपनी सक्रियता दिखाते हुए 6 संपत्तियों से कुल 79,84,390 रुपये की भारी-भरकम राशि वसूल की। आयुक्त डॉ. गौरव सैनी ने इस पूरी मुहिम पर स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि शहर के सुनियोजित विकास के लिए राजस्व की वसूली अनिवार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि कर जमा न करने वालों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और आने वाले दिनों में नियमानुसार सीज एवं कुर्की की यह कार्रवाई और अधिक तीव्रता के साथ जारी रहेगी। प्रशासन के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि बकाया करदाताओं के पास अब समय पर भुगतान करने के अलावा और कोई विकल्प शेष नहीं है।

Pratahkal Newsroom

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