जयपुर। गुलाबी नगरी के धार्मिक स्थलों की पवित्रता और पर्यावरणीय मर्यादा को अक्षुण्ण बनाए रखने की दिशा में नगर निगम जयपुर द्वारा एक अत्यंत सराहनीय और अभिनव पहल का आगाज़ किया गया है। आस्था के केंद्रों पर स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता फैलाने और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण हेतु निगम प्रशासन ने मंदिरों में विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। इस मुहिम के अंतर्गत विभिन्न मंदिरों के प्रांगण में अलग-अलग श्रेणी के पात्र रखवाए गए हैं, ताकि पूजा-पाठ के पश्चात निकलने वाली सामग्री का वैज्ञानिक और मर्यादित निस्तारण किया जा सके। श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु स्थापित इन पात्रों में धार्मिक तस्वीरें, फूल-माला, दीपक, रोली-टीका एवं अन्य पूजन सामग्री को पृथक-पृथक डालने की व्यवस्था की गई है।

इस दूरदर्शी पहल का प्राथमिक उद्देश्य न केवल धार्मिक स्थलों की दिव्यता और शुचिता को बनाए रखना है, बल्कि पूजा सामग्री के अव्यवस्थित विसर्जन से होने वाले जल प्रदूषण पर प्रभावी अंकुश लगाना भी है। अक्सर पूजा अवशेषों को नदियों या जलाशयों में प्रवाहित करने से जल स्रोत प्रदूषित होते हैं, जिसे रोकने के लिए नगर निगम की टीमें धरातल पर सक्रियता से कार्य कर रही हैं। निगम के कर्मचारी श्रद्धालुओं को प्रत्यक्ष रूप से जागरूक कर रहे हैं कि वे अपनी श्रद्धा के अवशेषों को निर्धारित पात्रों में ही विसर्जित करें। स्वच्छता के इस महाभियान में जनभागीदारी सुनिश्चित करते हुए नगर निगम जयपुर ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक आस्था एक-दूसरे के पूरक हैं, और सामूहिक सहयोग से ही शहर के आध्यात्मिक केंद्रों को स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त रखा जा सकता है।

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