जयपुर। गुलाबी नगरी के रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों में नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) की वसूली को लेकर नगर निगम जयपुर ने अब आर-पार की जंग छेड़ दी है। सोमवार को सिविल लाइन जोन में निगम की टीम ने जो सख्त रुख अख्तियार किया, उसने शहर के बड़े बकायेदारों की नींद उड़ा दी है। बार-बार के नोटिस और मोहलत को दरकिनार करने वाले संपत्ति स्वामियों पर कार्रवाई करते हुए निगम ने एक साथ पांच बड़ी संपत्तियों पर कुर्की की गाज गिराई है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद पूरे इलाके के व्यावसायिक गलियारों में हड़कंप का माहौल देखा जा रहा है।

प्रशासनिक स्तर पर इस मुहिम की कमान खुद नगर निगम जयपुर के आयुक्त डॉ. गौरव सैनी संभाल रहे हैं। उनके स्पष्ट निर्देशों के बाद उपायुक्त सिविल लाइन जोन देवानंद शर्मा ने कुर्की के आदेश जारी किए, जिसे धरातल पर उतारने के लिए सोमवार सुबह ही राजस्व विभाग की भारी-भरकम टीम मैदान में उतर गई। राजस्व अधिकारी प्रशांत लखन और सहायक राजस्व निरीक्षक सत्य नारायण के नेतृत्व में टीम ने जब चिन्हित संपत्तियों पर दस्तक दी, तो वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। निगम की इस सख्ती का असर भी तुरंत देखने को मिला, जहां कार्रवाई के डर से दो संपत्ति स्वामियों ने मौके पर ही 2,80,407 रुपये का बकाया टैक्स जमा कराकर अपनी साख बचाने की कोशिश की।

हालांकि, जिन संपत्तियों ने नियमों की अनदेखी जारी रखी, उन पर प्रशासन ने कोई रहम नहीं दिखाया। शास्त्री नगर स्थित रामनगर शॉपिंग सेंटर, एम.आई. रोड के प्रतिष्ठित सांगानेर उपासना टॉवर और सी-स्कीम जैसे वीआईपी क्षेत्र की विभिन्न व्यावसायिक संपत्तियों को विभाग ने कुर्की और सीज की प्रक्रिया के दायरे में ले लिया। यह पूरी कार्रवाई नियमानुसार उन संपत्तियों पर की गई है जिन्हें पूर्व में कई बार नोटिस देकर आगाह किया गया था, लेकिन उनकी ओर से भुगतान को लेकर कोई सक्रियता नहीं दिखाई गई थी।

नगर निगम प्रशासन ने इस कार्रवाई के जरिए एक कड़ा संदेश दिया है कि शहर के विकास कार्यों में बाधा बनने वाली कर चोरी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निगम के अधिकारियों ने साफ किया है कि आय में वृद्धि और सार्वजनिक सुविधाओं के सुचारू संचालन के लिए यह अभियान थमने वाला नहीं है। यह केवल एक शुरुआत है और आने वाले दिनों में उन सभी संपत्तियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है जो सालों से टैक्स दबाए बैठी हैं। निगम ने नागरिकों और व्यापारियों से अपील की है कि वे कानूनी पेचीदगियों और कुर्की जैसी अपमानजनक कार्रवाई से बचने के लिए स्वेच्छा से अपना बकाया कर जमा कर शहर के विकास में भागीदार बनें।

Pratahkal Bureau

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