जयपुर। गुलाबी नगरी में नगर निगम की राजस्व वसूली टीम ने शुक्रवार को एक बड़ी और सख्त कार्रवाई को अंजाम देकर बकायादारों के बीच हड़कंप मचा दिया। नगर निगम आयुक्त डॉ. गौरव सैनी के कड़े रुख और स्पष्ट निर्देशों के बाद नगर निगम प्रशासन एक्शन मोड में नजर आ रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को मुरलीपुरा जोन के उपायुक्त श्री पवन कुमार शर्मा के नेतृत्व में निगम की टीम ने नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) जमा न करने वाले डिफाल्टरों के खिलाफ कुर्की और सीलिंग का सघन अभियान चलाया। यह कार्रवाई न केवल बकाया राजस्व की वसूली के लिए थी, बल्कि उन संस्थानों के लिए एक कड़ी चेतावनी भी थी जो बार-बार नोटिस के बावजूद सरकारी शुल्क जमा करने में कोताही बरत रहे हैं।

अभियान के दौरान मुरलीपुरा जोन की टीम ने जब पांच बड़ी संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की, तो बकायादारों में अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त हो गया। कार्रवाई की गंभीरता को देखते हुए मौके पर ही पांच संपत्ति धारकों ने हार मान ली और तत्काल प्रभाव से 8 लाख 94 हजार 767 रुपये का भुगतान कर अपनी संपत्तियों को कुर्की से बचाया। उपायुक्त श्री पवन कुमार शर्मा ने बताया कि इन संपत्ति स्वामियों ने राज्य सरकार द्वारा वर्तमान में ब्याज और पेनल्टी पर दी जा रही विशेष छूट का लाभ उठाते हुए आरटीजीएस और चेक के माध्यम से यह राशि निगम कोष में जमा कराई। इसमें मुख्य रूप से देव नगर बड़ारणा स्थित प्लाट संख्या 11 (खसरा नं. 906, 907), प्लाट संख्या 1/2/3 (खसरा नं. 906, 907) तथा वीकेआई रोड नंबर 17 पर जे.एस. कॉलोनी स्थित दो अन्य संपत्तियां शामिल थीं। राशि प्राप्त होने के बाद इन सभी संपत्तियों को कुर्की से मुक्त कर दिया गया।

राजस्व वसूली के इस कड़े रुख के बीच निगम ने नियमों का उल्लंघन करने वाले दो विवाह स्थलों (मैरिज गार्डन्स) पर भी अपना चाबुक चलाया। जे.एस. कॉलोनी, लक्ष्मी स्कूल के पास रोड नंबर 17 पर स्थित दो मैरिज गार्डनों द्वारा पंजीकरण शुल्क जमा नहीं कराया गया था, जिसके फलस्वरूप निगम की टीम ने इन्हें मौके पर ही सीज कर दिया। इस पूरी महत्वपूर्ण कार्रवाई के दौरान मौके पर राजस्व अधिकारी श्रीमती संगीता जैन, राजस्व निरीक्षक श्री अरविंद सैनी, सहायक राजस्व निरीक्षक श्री शिवम सिसोदिया और पूरी राजस्व टीम मुस्तैद रही। निगम की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि नगर निगम प्रशासन अब कर चोरी और बकाया शुल्क के मामलों में किसी भी प्रकार की ढील देने के मूड में नहीं है, जिससे शहर के विकास कार्यों के लिए आवश्यक राजस्व सुनिश्चित किया जा सके।

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