मुकेश की 50वीं पुण्यतिथि पर जयपुर में गूंजे अमर गीत, सुरमयी शाम में कलाकारों ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि
जयपुर में मुकेश की 50वीं पुण्यतिथि पर संगीत संध्या में कलाकारों ने उनके अमर गीत गाकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी, गूंजती रहीं तालियां।

तस्वीर में जयपुर के महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में आयोजित संगीत संध्या के दौरान मंच पर बाईं ओर नीली साड़ी में महिला गायिका और दाईं ओर नेहरू जैकेट पहने पुरुष गायक माइक पर गीत गाते हुए नजर आ रहे हैं।
जयपुर में हिंदी सिनेमा के महान पार्श्व गायक मुकेश की 50वीं पुण्यतिथि पर आयोजित संगीत संध्या में उनके अमर गीतों की गूंज ने संगीतप्रेमियों को भावविभोर कर दिया। विद्याश्रम स्कूल के महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में गुलाबी नगरी के कलाकारों ने मुकेश के सदाबहार गीतों को अपनी आवाज देकर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रस्तुतियों के माध्यम से मुकेश की आवाज में छिपे दर्द, प्रेम, संवेदना और जीवन की सादगी को प्रभावी ढंग से सामने रखा गया।
इंजीनियर किशोर सरावगी, आर्किटेक्ट धीरज झामरिया और एडवोकेट जय शर्मा की अगुवाई में हुए कार्यक्रम में शहर के विभिन्न गायक-गायिकाओं ने मुकेश के लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। संगीत संध्या की शुरुआत “तुम ना जाने किस जहाँ में खो गए” गीत के सामूहिक गायन से हुई। इसके बाद मुकेश के लोकप्रिय गीतों की एक के बाद एक प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को उनकी स्वर्णिम संगीत यात्रा की याद दिला दी।
कार्यक्रम में सबसे पहले रवि जी एवं टीम ने वाद्य यंत्रों पर संगीत मेडली प्रस्तुत की। इसके बाद अनुराधा माथुर ने स्वागत भाषण दिया और टीवी अभिनेता हर्ष खुराना का परिचय कराया। हर्ष खुराना ने स्वर्गीय मुकेश के हिंदी फिल्म संगीत के क्षेत्र में किए गए योगदान पर प्रकाश डाला।
इसके बाद किशोर सरावगी और ममता झा ने युगल गीत “दिल तड़प तड़प के कह रहा है” प्रस्तुत किया। धीरज झामरिया व कोपल माथुर ने “हम तुम चोरी से बंधे इक डोरी से” गीत पेश किया। एडवोकेट जय शर्मा और निकिता बंसल की जोड़ी ने “किसी राह में किसी मोड़ पर” गीत को स्वर दिए।
इसके बाद प्रसिद्ध कलाकार जीतू ठाकुर एवं उनकी टीम ने वायलिन पर वाद्य संगीत की विशेष प्रस्तुति दी। गीत-संगीत का सिलसिला आगे बढ़ा तो किशोर सरावगी व आँचल सरावगी ने “एक प्यार का नगमा है”, जय शर्मा व अनुराधा माथुर ने “मैं न भूलूँगा” और धीरज झामरिया व प्रिया बोथरा ने “मुझे दर्द रहता है” गीत प्रस्तुत किए।
विकास माथुर ने “ज़िंदगी और बता तेरा इरादा क्या है”, किशोर सरावगी ने “ये मेरा दीवानापन है”, जय शर्मा ने “जिन्हें हम भूलना चाहें” और धीरज झामरिया ने “सुहानी चाँदनी रातें” गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में संगीत का रंग और गहरा कर दिया।
कार्यक्रम में “मेरा प्यार भी तू है”, “धीरे धीरे बोल”, “एक मंज़िल राही दो”, “हम तुम यूँ ही से”, “सावन का महीना”, “दिल की नज़र से, नज़रों के दिल से”, “क्या खूब लगती हो”, “सजनवा बैरी हो गये”, “चेहरे से ज़रा आँचल”, “हमसफ़र मेरे हमसफ़र” तथा “हम तो तेरे आशिक” जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुतियों ने माहौल को पूरी तरह रूमानी बना दिया।
कार्यक्रम के अंत में मेडली की शानदार प्रस्तुति दी गई। इस प्रस्तुति के साथ मुकेश के अमर संगीत को समर्पित यह विशेष संध्या यादगार बन गई। ऑडिटोरियम में लगातार गूंजती तालियों से संगीतप्रेमियों ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और कार्यक्रम की भरपूर प्रशंसा की।

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