गुलाबी नगरी के युवा मार्शल आर्ट्स योद्धाओं ने अपनी अदम्य शक्ति और असाधारण कौशल का परिचय देते हुए खेल जगत के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया है। शिवा क्लब मार्शल आर्ट्स अकादमी के इन प्रतिभावान खिलाड़ियों ने आधिकारिक एडजुडिकेटर राजा मूकिम की प्रत्यक्ष गरिमामयी उपस्थिति में इंडिया और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के लिए अपना सफल आधिकारिक प्रयास पूर्ण किया। यह आयोजन न केवल शहर में मार्शल आर्ट्स के बढ़ते मानक का प्रमाण बना, बल्कि इसने युवा प्रतिभाओं की असीमित क्षमताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर मजबूती से स्थापित कर दिया है।

रिकॉर्ड की इस कड़ी में 11 वर्षीय बाल खिलाड़ी विहान जैन ने अपनी बिजली जैसी गति और सटीक तकनीक से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। विहान ने मात्र 1 मिनट की समय सीमा में 134 फ्रंट स्लैप किक्स लगाकर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। पूर्व में भी इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना स्थान सुरक्षित कर चुके विहान ने इस नवीनतम प्रदर्शन के माध्यम से अब एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना दावा अत्यंत सुदृढ़ कर लिया है। वहीं दूसरी ओर, नेशनल मेडलिस्ट और ब्लैक बेल्ट 2nd डैन रक्षत धनोपिया ने शक्ति और सहनशक्ति का अद्भुत समन्वय पेश किया। रक्षत ने 2 किलोग्राम अतिरिक्त वजन के साथ चुनौती स्वीकार करते हुए 1 मिनट में 242 एल्बो अटैक किए, जो उनकी तकनीकी दक्षता और शारीरिक सामर्थ्य का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा।

खिलाड़ियों के इस मनोबल को बढ़ाने के लिए समारोह में कई प्रतिष्ठित हस्तियां सम्मिलित हुईं। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर सुरभि शर्मा ने खिलाड़ियों के कठोर परिश्रम और खेल के प्रति उनके अटूट समर्पण की मुक्त कंठ से सराहना की। इस अवसर पर सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के सहायक लेखा अधिकारी प्रथम राजेश कुमार ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और विजेताओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। विशेष रूप से, दो बार के पैरा ओलंपियन कृष्णा नागर ने कार्यक्रम में पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया, जिससे आयोजन की गरिमा द्विगुणित हो गई।

अकादमी के मुख्य कोच प्रदीप सिंह राघव ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता खिलाड़ियों के निरंतर अनुशासन और साधना का प्रतिफल है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्रदेश के अन्य युवाओं को भी खेल और आत्मरक्षा के प्रति प्रेरित करने में मील का पत्थर साबित होगी। जयपुर की यह गौरवगाथा अब अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर शहर को एक नई और विशिष्ट पहचान दिलाने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।

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