जयपुर, 12 जनवरी। राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस की राजनीति पर कड़ा प्रहार करते हुए विकसित भारत के संकल्प और ग्रामीण विकास की नई दिशा को रेखांकित किया है। राजधानी जयपुर में मीडिया से मुखातिब होते हुए राठौड़ ने कांग्रेस द्वारा 'वीबी-जी राम जी' (विकसित भारत गारंटी- रोजगार और आजीविका मिशन) योजना के विरोध को पूरी तरह से आधारहीन और जनता को भ्रमित करने वाला करार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस को 'राम' नाम से आखिर इतनी आपत्ति क्यों है, जबकि यह योजना ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने और भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने के ध्येय से लाई गई है।

राठौड़ ने योजना की गहराई पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मनरेगा के स्वरूप में किया गया यह सुधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरगामी सोच का परिणाम है। अब इस योजना के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति वर्ष 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है। उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल की विसंगतियों पर उंगली उठाते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान जॉब कार्ड के वितरण में भारी अनियमितताएं थीं, यहाँ तक कि संपन्न लोगों के नाम पर भी कार्ड बना दिए गए थे। राठौड़ ने पूर्व मंत्री रमेश मीणा का स्मरण कराते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं सार्वजनिक मंचों से मनरेगा में व्याप्त घोटालों को स्वीकार किया था। इसके विपरीत, वर्तमान व्यवस्था में पहचान के आधार पर पारदर्शी तरीके से जॉब कार्ड बनाए जा रहे हैं और मजदूरी का भुगतान 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया गया है, जिसमें देरी होने पर मुआवजे का कड़ा प्रावधान भी शामिल है।

राजनीतिक शुचिता और नैतिक मूल्यों पर चर्चा करते हुए मदन राठौड़ ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों को 'मौन के नाम पर दिखावा' बताया। उन्होंने कटाक्ष किया कि जो नेता मौन अनशन पर बैठने का दावा कर रहे थे, वे मोबाइल पर चर्चा और मीडिया को बाइट देने में व्यस्त थे। उन्होंने कांग्रेस की दोहरी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में कोयला घोटाले पर जब केंद्रीय एजेंसियां कार्रवाई करती हैं और वहां की मुख्यमंत्री द्वारा जांच को प्रभावित किया जाता है, तब कांग्रेस पूरी तरह मौन रहती है। वहां कांग्रेस के वजूद को नकारे जाने के बावजूद उनका विरोध न करना उनकी हल्की और बिना सोच वाली राजनीति का परिचायक है।

लेख के अंतिम चरण में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने एक संवेदनशील सामाजिक पहलू की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में 'कुटुंब प्रबंधन' की नितांत आवश्यकता है। आधुनिकता और तकनीक की दौड़ में परिवारों के बीच बढ़ती दूरियों पर चिंता जताते हुए उन्होंने आह्वान किया कि लोग मोबाइल से दूरी बनाकर परिवार के साथ समय बिताएं, साथ बैठकर भोजन करें और आपसी समस्याओं पर चर्चा करें। उन्होंने बच्चों में बढ़ती गुस्से की प्रवृत्ति को समाज के लिए घातक बताया और संयमित संवाद को इसका एकमात्र समाधान माना। राठौड़ का यह संबोधन न केवल राजनीतिक कड़वाहट पर प्रहार था, बल्कि एक विकसित और समृद्ध भारत के निर्माण के लिए सामाजिक एकजुटता का भी आह्वान था।

Pratahkal Newsroom

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