जयपुर: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे को लोकायुक्त ने सौंपा 37वां वार्षिक प्रतिवेदन, सुशासन और पारदर्शिता पर हुई गहन चर्चा
जयपुर के लोकभवन में राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे को लोकायुक्त न्यायमूर्ति श्री प्रताप कृष्ण लोहरा ने वर्ष 2025 का 37वां वार्षिक प्रतिवेदन सौंपा। इस दौरान राजस्थान में सुशासन, लोक सेवकों की जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गहन चर्चा की गई। यह रिपोर्ट प्रदेश में भ्रष्टाचार मुक्त शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सरकारी तंत्र में ईमानदारी को बढ़ावा देगी।

जयपुर, 2 जनवरी। राजस्थान की संवैधानिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कड़ी जुड़ी, जब गुलाबी नगरी स्थित लोकभवन में लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती की गूँज सुनाई दी। राजस्थान के माननीय राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे से शुक्रवार को लोकायुक्त न्यायमूर्ति श्री प्रताप कृष्ण लोहरा ने शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात मात्र एक औपचारिक मिलन नहीं थी, बल्कि प्रदेश में जवाबदेही और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की संकल्पना को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम थी।
इस गरिमामय भेंट के दौरान न्यायमूर्ति श्री प्रताप कृष्ण लोहरा ने राज्यपाल को लोकायुक्त, राजस्थान का 37वां वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। यह विस्तृत रिपोर्ट 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक की अवधि के दौरान लोकायुक्त सचिवालय द्वारा किए गए कार्यों, जांचों और उपलब्धियों का एक आधिकारिक लेखा-जोखा है। प्रतिवेदन सौंपते समय दोनों विभूतियों के मध्य राज्य की प्रशासनिक शुचिता को लेकर गंभीर विमर्श हुआ।
वार्ता के केंद्र में लोक प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण विषय रहे। लोकायुक्त श्री लोहरा ने राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे को विस्तार से अवगत कराया कि किस प्रकार लोकायुक्त संस्था लोक सेवकों की जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए निरंतर सक्रिय है। उन्होंने संस्थान द्वारा विभिन्न स्तरों पर किए गए उन प्रयासों और सुधारात्मक कदमों की भी जानकारी दी, जिनका उद्देश्य आम जन को न्याय दिलाना और सरकारी तंत्र में ईमानदारी के प्रवाह को बढ़ाना है।
राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने प्रतिवेदन को स्वीकार करते हुए प्रशासन में शुचिता बनाए रखने में लोकायुक्त की भूमिका की सराहना की। यह आयोजन राजस्थान में सुशासन (गुड गवर्नेंस) की अवधारणा को और अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ संवैधानिक संस्थानों की सक्रियता को भी रेखांकित करता है। यह प्रतिवेदन अब प्रदेश की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को और अधिक उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक मार्गदर्शक दस्तावेज सिद्ध होगा।

Pratahkal Bureau
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