जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल (JLF) में लेखिका अंशु हर्ष के पहले उपन्यास ‘इच्छा मृत्यु’ का भव्य लोकार्पण हुआ। वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का विमोचन वरिष्ठ लेखिका माला श्री लाल और पीआर एक्सपर्ट जगदीप सिंह की उपस्थिति में किया गया। कविता से नॉवल तक के साहित्यिक सफर और आत्म-संवाद की गहराई को दर्शाते इस विशेष सत्र की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।जयपुर। गुलाबी नगरी के हृदय स्थल पर आयोजित दुनिया के सबसे बड़े साहित्यिक समागम, जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल (JLF) में भावनाओं और शब्दों का एक अनूठा संगम देखने को मिला। अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के बागान वेन्यू में आयोजित 'पोएट्री – खुद से बात' सत्र उस समय स्मरणीय बन गया जब लेखिका, कवयित्री और प्रकाशक अंशु हर्ष के पहले बहुप्रतीक्षित उपन्यास ‘इच्छा मृत्यु’ का आधिकारिक लोकार्पण हुआ। प्रतिष्ठित वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस उपन्यास का विमोचन प्रख्यात लेखिका एवं अनुवादक माला श्री लाल के कर-कमलों द्वारा किया गया, जिसने राजस्थान के साहित्यिक परिदृश्य में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

इस विशेष सत्र का संचालन करते हुए विख्यात कवि और पीआर एक्सपर्ट जगदीप सिंह ने अंशु हर्ष के साथ एक आत्मीय और वैचारिक संवाद स्थापित किया। संवाद की शुरुआत कविता और गद्य के अंतर्संबंधों से हुई, जहाँ अंशु हर्ष ने अपनी रचनात्मक यात्रा के रहस्यों को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कविता जहाँ मन की भावनाओं का तात्कालिक और प्रखर स्वरूप है, वहीं एक उपन्यास का सृजन पात्रों के साथ निरंतर जीने और एक लंबी वैचारिक यात्रा तय करने की मांग करता है। उनका नवीन उपन्यास ‘इच्छा मृत्यु’ केवल एक कहानी मात्र नहीं है, बल्कि यह जीवन और मृत्यु के शाश्वत संघर्ष को रेखांकित करती एक ऐसी कृति है, जो पाठकों को आत्मचिंतन के गहरे सागर में उतरने पर विवश कर देती है।

अंशु हर्ष ने अपनी पूर्व कृति ‘समंदर – दी ओशन’ के अंग्रेजी अनुवाद के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि अनुवाद मात्र शब्दों का रूपांतरण नहीं, बल्कि संस्कृतियों के बीच एक सेतु है, जो मूल संवेदनाओं को अक्षुण्ण रखते हुए वैश्विक पाठकों तक पहुँचाता है। वर्ष 2013 में अपनी पहली पुस्तक के प्रकाशन से लेकर अब तक के सफर को उन्होंने व्यक्तिगत अनुभवों से सामाजिक सरोकारों की ओर बढ़ने वाली एक परिपक्व यात्रा बताया। सत्र का सबसे मार्मिक अंश तब आया जब उन्होंने कविता को 'स्वयं से की गई बात' के रूप में परिभाषित किया। उनके अनुसार, कविता लिखना एक साहस का कार्य है क्योंकि इसमें कवि अपने भीतर की सच्चाइयों से रूबरू होता है, जिससे लेखक और पाठक के बीच एक अटूट संवेदनात्मक संबंध स्थापित होता है। जेएलएफ के इस उद्घाटन सत्र में भारी संख्या में उमड़े साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति ने इस विमोचन समारोह को और भी गरिमामय बना दिया।

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Pratahkal Bureau

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