जयपुर-कोटा: वीएमओयू के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल का आह्वान, 75 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिली उपाधियाँ
जयपुर और कोटा में आयोजित वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के 18वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने 75,925 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान कीं। 'राष्ट्र सर्वोपरि' के मंत्र के साथ विद्यार्थियों को विकसित भारत के निर्माण में भागीदारी का आह्वान किया गया। उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा और प्रो. मंजू बाघमार ने युवाओं को ईमानदारी और सेवा भाव से राष्ट्र निर्माण की सीख दी।

जयपुर/कोटा। शिक्षा के मंदिर जब राष्ट्र के उत्थान का संकल्प लेते हैं, तो वह केवल डिग्री वितरण का केंद्र नहीं, बल्कि भविष्य के भारत की नींव रखने का अनुष्ठान बन जाते हैं। गुरुवार को कोटा स्थित वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (वीएमओयू) का 18वां दीक्षांत समारोह कुछ इसी गौरवमयी आभा के साथ संपन्न हुआ। इस भव्य आयोजन में 'राष्ट्र सर्वोपरि' की गूंज सुनाई दी, जहाँ राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने हज़ारों युवाओं को ज्ञान और संस्कारों की दीक्षा देते हुए उन्हें विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने का पथ दिखाया।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कुल 75,925 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियाँ प्रदान कीं, जिनमें तीन शोधार्थियों को मिली पीएचडी की मानद उपाधियाँ भी शामिल थीं। इस अवसर पर राज्यपाल ने शिक्षा की सार्थकता पर बल देते हुए कहा कि ज्ञान का वास्तविक उपयोग तभी है जब वह व्यक्ति निर्माण और राष्ट्र के कल्याण में सहायक बने। उन्होंने देव-दानव संस्कृति के प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से विद्यार्थियों को आपसी सहयोग और साहचर्य के साथ आगे बढ़ने की सीख दी। तैत्तिरीय उपनिषद, श्रीमद्भगवत गीता और स्वामी विवेकानंद एवं महर्षि अरविंद के दर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता बताई। उन्होंने शिक्षकों को भी नसीहत दी कि वे विद्यार्थियों को अपनी संतान के समान मानकर उनके भविष्य और चारित्रिक विकास के प्रति संवेदनशील रहें।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने दीक्षित विद्यार्थियों को विकसित भारत के मजबूत स्तंभ के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने युवाओं को ईमानदारी और कर्तव्य निष्ठा को अपना मूल मंत्र बनाने की प्रेरणा दी। वहीं, सार्वजनिक निर्माण तथा महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री प्रो. मंजू बाघमार ने युवा शक्ति को संबोधित करते हुए कहा कि यह डिग्री केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि राष्ट्र का अटूट विश्वास है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी जड़ों से जुड़े रहने और शिक्षा को सुविधा के बजाय सेवा का माध्यम बनाने का आग्रह किया।
समारोह का मुख्य दीक्षांत भाषण इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. उमा कांजीलाल द्वारा दिया गया। आयोजन के अंत में, यह स्पष्ट संदेश उभरा कि वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय से निकले ये हज़ारों युवा न केवल डिग्री धारक हैं, बल्कि वे जिम्मेदार नागरिक और समाज के पथ-प्रदर्शक बनकर भारत को पुनः 'विश्वगुरु' के पद पर प्रतिष्ठित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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