जयपुर: आपकी सुस्त मेटाबॉलिज़्म के पीछे कहीं थायरॉयड का हाथ तो नहीं? जानिए कैसे यह छोटी ग्रंथि बन रही है बड़े खतरों की जड़
जयपुर में विशेषज्ञों ने थायरॉयड और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के बीच गहरे संबंध पर चेतावनी दी है। डॉ. किन्नेरा पुटरेवु और डॉ. अभिषेक प्रकाश के अनुसार, हाइपोथायरॉयडिज़्म मेटाबॉलिज़्म को धीमा कर हृदय रोग और डायबिटीज़ का खतरा बढ़ाता है। भारत में हर 10 में से 1 व्यक्ति इससे प्रभावित है। समय पर जांच और जागरूकता के माध्यम से ही इस गंभीर स्वास्थ्य संकट से बचा जा सकता है।

जयपुर, 21 जनवरी 2026: गुलाबी नगरी के स्वास्थ्य गलियारों में इन दिनों एक अदृश्य खतरे की गूँज सुनाई दे रही है। गर्दन के सामने स्थित वह छोटी सी तितली के आकार की थायरॉयड ग्रंथि, जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, वास्तव में हमारे शरीर के 'कंट्रोल रूम' की तरह काम करती है। यदि यह ग्रंथि अपनी लय खो दे, तो मेटाबॉलिज़्म का पूरा चक्र बिखर जाता है, जिससे वजन, हृदय गति और ब्लड शुगर जैसे जीवन के आधारभूत स्तंभ डगमगाने लगते हैं। वर्तमान स्वास्थ्य परिदृश्य में विशेषज्ञों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है कि मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जूझ रहे हर चार में से एक व्यक्ति अनजाने में हाइपोथायरॉयडिज़्म का शिकार हो सकता है। विश्व थायरॉयड जागरूकता माह के इस महत्वपूर्ण अवसर पर यह समझना अनिवार्य हो गया है कि कैसे एक सूक्ष्म हार्मोनल असंतुलन जानलेवा बीमारियों का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।
एबॉट इंडिया की मेडिकल अफेयर्स हेड डॉ. किन्नेरा पुटरेवु ने इस विषय पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि हाइपोथायरॉयडिज़्म अपने शुरुआती दौर में एक 'छद्म शत्रु' की तरह व्यवहार करता है। इसके लक्षण मेटाबॉलिक सिंड्रोम से इतनी बारीकी से मिलते हैं कि अक्सर मरीज़ और चिकित्सक दोनों ही भ्रमित हो जाते हैं। डॉ. पुटरेवु के अनुसार, जो लोग पहले से ही मेटाबॉलिक जोखिम कारकों की श्रेणी में हैं, उनके लिए नियमित थायरॉयड जांच अब विकल्प नहीं बल्कि एक अनिवार्यता बन गई है। इसी क्रम में जयपुर के मंगलम एवं मेडिसिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक प्रकाश ने चिकित्सा विज्ञान के इस जटिल पक्ष को उजागर करते हुए बताया कि जब थायरॉयड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन का उत्पादन बंद कर देती है, तो शरीर की आंतरिक मशीनरी धीमी पड़ जाती है। यह सुस्ती न केवल वजन बढ़ाती है, बल्कि एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाकर और इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करके हृदय रोग और टाइप-2 डायबिटीज़ के लिए दरवाज़े खोल देती है।
मेटाबॉलिक सिंड्रोम का संकट आज वैश्विक स्तर पर पैर पसार चुका है, जहाँ हर चौथा व्यक्ति इसकी चपेट में है। यह कोई एकल बीमारी नहीं, बल्कि उच्च रक्तचाप, बढ़ा हुआ ब्लड शुगर और पेट के आसपास जमा होने वाली जिद्दी चर्बी जैसे घातक विकारों का एक समूह है। जब किसी व्यक्ति में इनमें से तीन या अधिक लक्षण एक साथ दिखाई देते हैं, तो स्ट्रोक और दिल के दौरे का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। भारत के संदर्भ में यह स्थिति और भी भयावह है क्योंकि यहाँ हर दस में से एक व्यक्ति हाइपोथायरॉयडिज़्म से ग्रसित है। आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़, तनाव, नींद की कमी और असंतुलित आहार ने इस समस्या को एक महामारी का रूप दे दिया है। समय रहते की गई जांच और विशेषज्ञ परामर्श ही वह एकमात्र ढाल है, जो हमें इन जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों से सुरक्षित रख सकती है।

Pratahkal Newsroom
प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
