जयपुर: विश्व हिन्दी दिवस पर राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने दी शुभकामनाएं, हिन्दी को बताया संस्कृति का आधार
जयपुर में विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए हिन्दी को भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग बताया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर हिन्दी भाषियों से अपनी मातृभाषा के गौरव को बढ़ाने और आधुनिक तकनीक के माध्यम से इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया। राज्यपाल ने हिन्दी को जन-जन की भाषा बताते हुए इसके संरक्षण और प्रसार पर विशेष बल दिया है।

जयपुर, 9 जनवरी। राजस्थान के राज्यपाल सचिवालय, लोकभवन से जारी एक संदेश में राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने विश्व हिन्दी दिवस के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों और विश्व भर में फैले हिन्दी प्रेमियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। १० जनवरी को मनाए जाने वाले इस वैश्विक पर्व की पूर्व संध्या पर राज्यपाल ने हिन्दी के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और अस्मिता का जीवंत प्रतीक बताया।
राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने अपने संबोधन में गहरी संवेदनशीलता के साथ इस बात पर जोर दिया कि हिन्दी महज एक भाषा की सीमाओं में नहीं बंधी है, अपितु यह हमारी गौरवशाली संस्कृति की संवाहक और जन-जन के हृदय की भाषा है। उन्होंने कहा कि हिन्दी की शक्ति उसकी सरलता और समावेशी प्रकृति में निहित है, जो विभिन्न समुदायों और भौगोलिक सीमाओं को एक सूत्र में पिरोने का सामर्थ्य रखती है। इस अवसर पर उन्होंने दुनिया के कोने-कोने में बसे हिन्दी भाषी समुदाय से भावुक अपील करते हुए आह्वान किया कि वे अपने दैनिक जीवन और घर-परिवार में इस भाषा का अधिकाधिक प्रयोग करें, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों और भाषाई विरासत से जुड़ी रह सकें।
प्रसार और तकनीक के आधुनिक युग की चुनौतियों का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि हम हिन्दी को आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों के साथ जोड़कर भावी पीढ़ी के लिए और अधिक सुगम एवं उपयोगी बनाएं। श्री बागडे ने जोर देकर कहा कि हमें केवल भाषा का उपयोग ही नहीं करना है, बल्कि इसके वैश्विक प्रसार के सक्रिय संवाहक भी बनना है। राज्यपाल का यह संदेश न केवल भाषाई गौरव को जागृत करता है, बल्कि हिन्दी को आधुनिक युग की प्रतिस्पर्धी भाषा बनाने के संकल्प को भी सुदृढ़ करता है। यह आयोजन और राज्यपाल का आह्वान इस बात की पुष्टि करता है कि हिन्दी अपनी पारंपरिक गरिमा को बनाए रखते हुए आधुनिक भविष्य की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रही है।

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