जयपुर। राजस्थान की उच्च शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन और जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से राजभवन अब कड़े तेवर अपना चुका है। जयपुर के लोकभवन में बुधवार को आयोजित कुलगुरु समन्वय समिति की उच्च स्तरीय बैठक में राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि अब प्रदेश के विश्वविद्यालयों को "सुधरो नहीं तो बंद करो" की नीति पर चलना होगा। शैक्षिक गुणवत्ता से किसी भी प्रकार के समझौते को स्वीकार न करने की बात कहते हुए उन्होंने उन संस्थानों पर ताला लगाने का संकेत दिया है जो मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। राज्यपाल ने दो टूक कहा कि यदि किसी विश्वविद्यालय ने बिना अनुमति के किसी कॉलेज को संबद्धता प्रदान की है, तो उस पर कठोरतम अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

बैठक के दौरान राज्यपाल ने उच्च शिक्षा को विकास की आधारशिला बताते हुए कुलगुरुओं का मनोबल बढ़ाने और विश्वविद्यालयों को संसाधन संपन्न बनाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि 'नेक' (NAAC) एक्रेडिटेशन में आ रही तमाम बाधाओं को समयबद्ध तरीके से दूर किया जाए। राज्यपाल ने प्रत्येक विश्वविद्यालय के कुलगुरु से व्यक्तिगत रूप से संवाद कर उनकी अड़चनों को जाना और आश्वस्त किया कि राज्य सरकार के स्तर पर लंबित भर्तियों और वित्तीय स्वीकृतियों को जल्द से जल्द हरी झंडी दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि किसी भी फाइल को अनिर्णय की स्थिति में न रखा जाए, बल्कि उन पर त्वरित और सार्थक निर्णय लिए जाएं।

शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर उसे भारतीय मूल्यों और ज्ञान परंपरा से जोड़ने के लिए राज्यपाल ने एक अभिनव पहल की शुरुआत की। उन्होंने निर्देश दिए कि विश्वविद्यालयों की दीवारों पर भारत के उस लुप्त और गौरवशाली इतिहास को प्रदर्शित किया जाए जो वर्तमान पाठ्यपुस्तकों से ओझल है। साथ ही, उन्होंने 'विद्यार्थी-अध्यापक संवाद' की परंपरा को पुनर्जीवित करने पर बल देते हुए कहा कि महीने में कम से कम दो बार ऐसी गोष्ठियां आयोजित हों जहाँ पुस्तकों से परे कला, संस्कृति और जीवन मूल्यों पर चर्चा हो सके। इसके अतिरिक्त, उन्होंने दीक्षांत समारोहों को प्रतिवर्ष आयोजित करने और उन्हें आडंबर रहित कर कम खर्च में संपन्न करने के निर्देश दिए। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने हर साल महालेखाकार (AG) ऑडिट कराने की अनिवार्यता पर भी जोर दिया।

इस महत्वपूर्ण बैठक में उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री प्रेमचंद बैरवा ने आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए रोस्टर प्रणाली के तहत जल्द कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री स्तर पर चर्चा कर पेंशन और भवन निर्माण जैसी सुविधाओं के विस्तार का भरोसा दिया। वहीं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेंद्र सिंह खींवसर, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री संदीप वर्मा और श्री कुलदीप रांका ने भी उच्च शिक्षा के ढांचे को सुदृढ़ करने पर विचार साझा किए। श्री रांका ने केंद्र सरकार की 'ग्लोबल टैलेंट रिटर्न स्कीम' और 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' जैसे नवाचारों से अवगत कराया, जबकि प्रमुख सचिव श्री सुबीर कुमार ने विश्वविद्यालयों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राजस्व सृजन के नए स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। बैठक में पशुपालन विभाग के सचिव डॉ. समित शर्मा, वित्त सचिव श्रीमती टीना सोनी, चिकित्सा शिक्षा सचिव श्री ललित कुमार और समाज कल्याण आयुक्त श्री इकबाल खान सहित राज्यपाल के सचिव डॉ. पृथ्वी ने भी गुणवत्ता सुधार और नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर अपने विचार रखे। अंत में, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं ने अपने संस्थानों में किए जा रहे नवाचारों की रिपोर्ट पेश की, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि राजस्थान अब शिक्षा के क्षेत्र में एक नई और पारदर्शी क्रांति की ओर अग्रसर है।

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