जयपुर। गुलाबी नगरी के नींदड़ क्षेत्र की पावन धरा बुधवार को अध्यात्म के एक अनूठे संगम की साक्षी बनी। राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने यहाँ आयोजित भव्य धार्मिक अनुष्ठान में शिरकत कर न केवल जगदगुरु रामभद्राचार्य के मुखारविंद से प्रवाहित हो रही दिव्य रामकथा का श्रवण किया, बल्कि 1008 श्री हनुमत महायज्ञ की पूर्णाहुति में सम्मिलित होकर लोक-कल्याण की कामना भी की। श्रद्धा और भक्ति के इस समागम ने जयपुर के आध्यात्मिक वातावरण को एक नई ऊंचाई प्रदान की, जहाँ राज्य के संवैधानिक प्रमुख ने भारतीय ज्ञान परंपरा के जीवंत प्रतीक के समक्ष शीश नवाया।

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य का आत्मीय अभिनंदन करते हुए उन्हें अध्यात्म परंपरा का महान मनीषी और आधुनिक भारत का प्रकाश स्तंभ बताया। राज्यपाल श्री बागडे ने इस अवसर पर भारतीय संस्कृति की गहराई का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वामी रामभद्राचार्य केवल एक कथावाचक नहीं, बल्कि वेद, उपनिषद और रामकथा के वे मर्मज्ञ हैं जो समाज को सत्य और आलोक का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने स्वामी जी की कठोर साधना और शास्त्र सम्मत ज्ञान को नमन करते हुए उनसे शुभाशीष प्राप्त किया। यह क्षण उपस्थित जनसमूह के लिए अत्यंत भावुक और गौरवशाली था, जब एक प्रखर विद्वान और राज्य के प्रथम नागरिक के बीच ज्ञान और सम्मान का यह अद्भुत विनिमय हुआ।

इसी आयोजन के दौरान रामकथा स्थल पर एक और विशिष्ट मिलन देखने को मिला, जब प्रसिद्ध साध्वी ऋतम्भरा ने राज्यपाल श्री बागडे से भेंट की और उनका अभिनंदन किया। धार्मिक मर्यादाओं और सांस्कृतिक मूल्यों से ओत-प्रोत इस गरिमामयी समारोह ने यह सिद्ध कर दिया कि सत्ता और अध्यात्म जब एक धरातल पर मिलते हैं, तो समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस आयोजन का समापन एक नई चेतना के साथ हुआ, जहाँ राज्यपाल की उपस्थिति ने सनातन संस्कृति के संरक्षण और विद्वानों के प्रति सम्मान की गौरवशाली परंपरा को और अधिक सुदृढ़ किया।

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