जयपुर में विरासत के संरक्षण की महातैयारी: 'पंच-गौरव' को जन-आंदोलन बनाने की हुंकार, कलेक्ट्रेट में खिंची विकास की नई रेखा
जयपुर जिला प्रशासन ने 'पंच-गौरव' योजना के तहत सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए कलेक्ट्रेट में समीक्षा बैठक की। अतिरिक्त जिला कलक्टर श्रीमती विनीता सिंह और डॉ. सुदीप कुमावत ने बजट स्वीकृति एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश दिए। इस योजना को अब जन-आंदोलन का रूप देकर स्कूलों और मेलों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया जाएगा, ताकि भावी पीढ़ी अपनी ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़ सके।

जयपुर। गुलाबी नगरी की ऐतिहासिक आभा और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में गुरुवार को एक निर्णायक कदम उठाया गया। जयपुर जिला प्रशासन ने 'पंच-गौरव' के संरक्षण, संवर्धन और विकास को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कलेक्ट्रेट सभागार में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की। यह बैठक केवल प्रशासनिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों को धरातल पर उतारने और इस योजना को एक जीवंत जन-आंदोलन में बदलने का रोडमैप तैयार किया गया। जिला कलक्टर के निर्देशों पर आयोजित इस विमर्श ने साफ कर दिया है कि जयपुर की सांस्कृतिक पहचान को अब आधुनिक विकास के साथ नए आयाम दिए जाएंगे।
बैठक की कमान संभालते हुए अतिरिक्त जिला कलक्टर प्रथम श्रीमती विनीता सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया कि बजट की उपलब्धता और कार्यों का क्रियान्वयन प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने राज्य स्तर से आवंटित बजट की बिंदुवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कड़ी हिदायत दी कि जिन परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृतियां अभी भी फाइलों में दबी हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से जारी किया जाए। वहीं, जिन कार्यों को हरी झंडी मिल चुकी है, उन्हें बिना किसी देरी के शुरू कर एक निश्चित समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य दिया गया। प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि योजनाओं का लाभ जनता को तभी महसूस होगा जब निर्माण और संरक्षण के कार्य धरातल पर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देंगे।
इस पूरी कवायद के पीछे मुख्यमंत्री महोदय की वह दूरगामी सोच है, जिसे उन्होंने 1 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान साझा किया था। मुख्य आयोजन अधिकारी डॉ. सुदीप कुमावत ने बैठक में उन निर्देशों की अनुपालना पर विशेष जोर दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि पंच-गौरव केवल पत्थरों या स्मारकों का संरक्षण नहीं है, बल्कि यह हमारी भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों और गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का एक सशक्त सेतु है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए अब राजकीय कार्यालयों के साथ-साथ निजी और सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में भी पंच-गौरव का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि युवाओं के भीतर अपनी विरासत के प्रति संवेदनशीलता और गौरव का भाव जाग्रत हो सके।
रणनीति के तहत अब जयपुर में आयोजित होने वाले मेलों, सांस्कृतिक उत्सवों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में पंच-गौरव के विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। इन स्टॉल्स के माध्यम से आमजन को न केवल इन स्थलों की ऐतिहासिक महत्ता बताई जाएगी, बल्कि उन्हें संरक्षण की प्रक्रिया में भागीदार बनने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। जिला प्रशासन का यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि कोई भी संरक्षण कार्य तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक उसमें समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी न हो। इस महत्वपूर्ण बैठक में श्री वी. केतन कुमार, श्री हरलाल बिजारनियां, श्री मान सिंह और श्री बाबूलाल मीणा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने आपसी समन्वय के साथ इन लक्ष्यों को हासिल करने का संकल्प लिया। यह पहल जयपुर की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने वाली है।

Pratahkal Bureau
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