जयपुर। धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण के अनूठे समन्वय का साक्षी बनते हुए नगर निगम जयपुर के आदर्श नगर जोन द्वारा वार्ड संख्या 130 स्थित पवित्र गलता पीठ कुण्ड पर एक विशेष स्वच्छता एवं जन-जागरूकता अभियान का सफल आयोजन किया गया। यह पहल न केवल आस्था के केंद्रों को स्वच्छ रखने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हुई, बल्कि इसने आधुनिक वैज्ञानिक निस्तारण प्रणालियों और पारंपरिक मान्यताओं के बीच एक सेतु का कार्य भी किया।

अभियान के दौरान कुण्ड पर आने वाले श्रद्धालुओं को पूजा-पाठ में प्रयुक्त होने वाली सामग्री, जिसमें फूल-माला, कपड़े, दीपक एवं अन्य धार्मिक अवशेष शामिल हैं, के उचित एवं वैज्ञानिक निस्तारण हेतु विशेष रूप से प्रेरित किया गया। नगर निगम की टीम ने श्रद्धालुओं को तकनीकी रूप से यह समझाया कि इन सामग्रियों को सीधे जल स्रोत में प्रवाहित करने से जल की शुद्धता समाप्त होती है और बढ़ता जल प्रदूषण अंततः पर्यावरण एवं जन-स्वास्थ्य पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को 'स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26' के दूरगामी लक्ष्यों और स्वच्छता के वास्तविक महत्व से सीधे तौर पर जोड़ना था।

इस विशेष अभियान की सफलता में जनभागीदारी का स्वरूप अत्यंत मुखर रहा, जहाँ उपस्थित नागरिकों ने निगम की इस पहल की सराहना करते हुए स्वयं सक्रिय सहयोग देने और निरंतर स्वच्छता बनाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया। यह आयोजन इस कड़े संदेश को प्रसारित करने में सफल रहा कि स्वच्छता का उत्तरदायित्व केवल नगर निगम का नहीं, बल्कि प्रत्येक अनुशासित नागरिक का मौलिक कर्तव्य है। कार्यक्रम के क्रियान्वयन में पीआईयू (PIU) टीम सहित वार्ड के मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक एवं उनकी टीम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही, जिनकी सक्रियता और समर्पण ने इस पूरे अभियान को धरातल पर सार्थक परिणाम तक पहुँचाया।

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