जयपुर के जय क्लब लॉन में महाअष्टमी के अवसर पर संधि पूजा के दौरान 108 कमल अर्पित किए गए, 108 दीप प्रज्वलित किए गए और केले, गन्ने तथा पेठे की प्रतीकात्मक बलि देकर मां दुर्गा की आराधना की गई। प्रोबासी बेंगाली कल्चरल सोसायटी (पीबीसीएस) की ओर से सी-स्कीम स्थित जय क्लब लॉन में आयोजित दुर्गा पूजा महोत्सव के तहत सोमवार को महाअष्टमी श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाई गई।

इस अवसर पर सुबह पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार संधि पूजा का विशेष आयोजन हुआ। अनुष्ठान के दौरान 108 कमल अर्पित करने, 108 दीप प्रज्वलित करने और केले, गन्ने तथा पेठे की प्रतीकात्मक बलि देने की परंपरा निभाई गई।


बंगाली दुर्गा पूजा में संधि पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है। यह अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के शुरुआती 24 मिनट के संधिकाल में संपन्न होती है। कुल 48 मिनट का यह समय मां दुर्गा की विशेष आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी संधिकाल में मां दुर्गा ने चंड और मुंड नामक असुरों का वध किया था। इसी मान्यता के चलते इस दौरान मां के चामुंडा स्वरूप की पूजा की जाती है।

धार्मिक अनुष्ठानों के बाद दोपहर में महिला एवं पुरुषों के लिए शंख वादन प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। इसके बाद मां दुर्गा का भोग श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। भोग ग्रहण करने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

शाम को प्रतिदिन की भांति सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान पीबीसीएस के अध्यक्ष डॉ. एस. के. सरकार ने अपने गीतों की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। उनके गीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरा परिसर संगीतमय वातावरण से गूंज उठा।

पीबीसीएस की ओर से आयोजित दुर्गा पूजा महोत्सव में महाअष्टमी के धार्मिक अनुष्ठानों, बंगाली परंपराओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का संगम देखने को मिला। संधि पूजा, प्रतीकात्मक बलि, शंख वादन प्रतियोगिता और संगीत कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं की भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया।

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