जयपुर: मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता से अब देश की सीमाओं के पार मिली राजस्थानियों को स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की ऐतिहासिक पहल पर अब राजस्थान की 'मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना' के तहत देश भर के 30 हजार से अधिक अस्पतालों में 25 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज मिलेगा। जयपुर से जारी इस नई व्यवस्था (आउट-बाउंड पोर्टेबिलिटी) के माध्यम से अब दिल्ली एम्स और मेदांता जैसे बड़े अस्पतालों में राजस्थान के करोड़ों परिवार कैशलेस उपचार प्राप्त कर सकेंगे, जिससे 'इलाज सबके लिए' का संकल्प साकार होगा।

जयपुर। राजस्थान की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में एक नए स्वर्णिम अध्याय का सूत्रपात करते हुए मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के नागरिकों के लिए चिकित्सा सुविधाओं के द्वार पूरे देश में खोल दिए हैं। मुख्यमंत्री की इस ऐतिहासिक और मानवीय पहल के फलस्वरूप 'मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना' (MAA) अब केवल प्रदेश तक सीमित न रहकर एक राष्ट्रव्यापी मिसाल बन गई है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के सतत प्रयासों से योजना के तहत अब देश भर के 30 हजार से अधिक अस्पतालों का एक विशाल नेटवर्क तैयार किया गया है, जिससे प्रदेश के करोड़ों परिवारों को अब अपनी पसंद के राष्ट्रीय स्तर के चिकित्सा संस्थानों में निःशुल्क उपचार मिल सकेगा। यह कदम न केवल यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में मील का पत्थर है, बल्कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे उन मरीजों के लिए एक वरदान है जो अब तक इलाज के भारी खर्च के डर से सीमाओं में बंधे थे।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के अनुसार, यह योजना केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) को एकीकृत कर एक वृहद स्वरूप में संचालित की जा रही है, जो अब प्रदेश के बाहर भी कैशलेस इलाज की शत-प्रतिशत गारंटी सुनिश्चित करती है। राज्य सरकार ने लगभग छह माह पूर्व इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी की दिशा में कदम बढ़ाते हुए पहले 'इन-बाउंड पोर्टेबिलिटी' लागू की थी, जिसके माध्यम से अन्य राज्यों के नागरिकों को राजस्थान में उपचार मिल रहा था। इसी कड़ी को विस्तार देते हुए 19 दिसम्बर से 'आउट-बाउंड पोर्टेबिलिटी' की सुविधा प्रभावी कर दी गई है। इस क्रांतिकारी निर्णय के बाद अब राजस्थान के पात्र परिवार देश के अन्य राज्यों के सूचीबद्ध अस्पतालों में बिना किसी आर्थिक बाधा के उपचार प्राप्त कर सकेंगे।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने इस निर्णय की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया कि अक्सर गंभीर रोगों के उपचार हेतु राजस्थान के मरीजों को गुजरात, दिल्ली और अन्य राज्यों के बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ता था, जहाँ अब तक उन्हें अपनी जमा-पूंजी खर्च करनी पड़ती थी। अब इस 'आउटबाउंड पोर्टिबिलिटी' के माध्यम से राजस्थान के सभी पात्र परिवारों को देश के अन्य राज्यों में 25 लाख रुपये तक के निःशुल्क उपचार की सुविधा मिलेगी। इस व्यवस्था में तमिलनाडु और कर्नाटक को छोड़कर देश के अन्य राज्यों के करीब 16 हजार सरकारी और 14 हजार निजी अस्पताल शामिल किए गए हैं। दिल्ली के 184, गुजरात के 2067, हरियाणा के 1366 और उत्तर प्रदेश के 6182 जैसे विशाल नेटवर्क के माध्यम से अब एम्स दिल्ली, मेदांता, पीजीआई चंडीगढ़ और लखनऊ के केएमपीयू जैसे ख्याति प्राप्त संस्थानों में राजस्थानियों का निःशुल्क इलाज सुनिश्चित होगा।
योजना की प्रगति और इसके प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री हरजीलाल अटल ने जानकारी साझा की कि आउट-बाउंड पोर्टेबिलिटी लागू होने के मात्र 15 दिनों के भीतर ही लगभग 350 रोगियों ने राज्य के बाहर उपचार प्राप्त करना शुरू कर दिया है। वर्तमान में 1.36 करोड़ पात्र परिवारों को 2200 प्रकार के उपचार पैकेजों के माध्यम से कैंसर, हृदय रोग और अंग प्रत्यारोपण जैसी जटिल बीमारियों के लिए सुरक्षा कवच प्रदान किया जा रहा है। विगत दो वर्षों के आंकड़े गवाह हैं कि 37 लाख से अधिक मरीजों को 7100 करोड़ रुपये से अधिक का कैशलेस उपचार प्रदान कर उन्हें नया जीवन दिया गया है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की यह दूरदर्शी पहल 'इलाज सबके लिए' के संकल्प को धरातल पर उतार रही है, जहाँ अब स्वास्थ्य सेवाओं की राह में न तो भौगोलिक दूरियां दीवार बनेंगी और न ही निर्धनता।

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