जयपुर: कृषि प्रशासन के 'लौह पुरुष' डॉ. हुशियार सिंह, जिनकी कार्यशैली बनी प्रदेश के लिए मिसाल
जयपुर: कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. हुशियार सिंह अपनी ईमानदारी और प्रशासनिक दक्षता के कारण प्रदेश में चर्चा का विषय बने हुए हैं। 1994 से सलूंबर से शुरू हुआ उनका सफर आज कृषि प्रशासन में अनुशासन का पर्याय बन चुका है। जानें कैसे एक अधिकारी ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा से विभागीय योजनाओं का लाभ अंतिम किसान तक पहुँचाकर राजस्थान के कृषि विकास में एक नया अध्याय लिख दिया है।

जयपुर। राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में जब अनुशासन, पारदर्शिता और अटूट ईमानदारी की बात आती है, तो एक नाम प्रमुखता से उभरता है— डॉ. हुशियार सिंह। वर्तमान में अतिरिक्त निदेशक, कृषि (प्रशासन) मुख्यालय के पद पर आसीन डॉ. सिंह ने अपनी कार्यकुशलता से न केवल विभाग की तस्वीर बदली है, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो तो सरकारी तंत्र को भी सेवा और दक्षता का सर्वोत्तम माध्यम बनाया जा सकता है।
डॉ. हुशियार सिंह के इस गौरवशाली सफर की शुरुआत वर्ष 1994 में उदयपुर खंड के सलूंबर जिले से हुई थी। एक युवा अधिकारी के रूप में राजकीय सेवा में कदम रखने के बाद से ही उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने तीन दशकों के लंबे सेवा काल में उन्होंने धौलपुर, अलवर, जयपुर, सीकर, चूरू, श्रीगंगानगर, बीकानेर और जालौर जैसे प्रदेश के चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण जिलों में अपनी सेवाएं दीं। कृषि, उद्यानिकी और जलग्रहण विकास भू-संरक्षण विभागों के विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्होंने प्रशासनिक उत्कृष्टता के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं।
उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता योजनाओं का केवल क्रियान्वयन नहीं, बल्कि उनका 'अंतिम छोर' तक पहुंचना है। डॉ. सिंह ने सुनिश्चित किया कि विभागीय योजनाओं के भौतिक और वित्तीय लक्ष्य केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका वास्तविक लाभ खेतों में पसीना बहाने वाले अंतिम पंक्ति के कृषक तक पहुंचे। उनके कार्यकाल में विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठकों का समयबद्ध आयोजन और भर्ती प्रक्रियाओं का निर्धारित सीमा में पूर्ण होना, उनके कुशल प्रबंधन और दूरदर्शिता का जीवंत प्रमाण है।
आज डॉ. हुशियार सिंह की निष्ठा और प्रशासनिक दक्षता कृषि प्रशासन के क्षेत्र में एक आदर्श बन चुकी है। उनके द्वारा लाए गए संस्थागत सुधारों ने विभाग में पारदर्शिता और गति का संचार किया है। यह केवल एक अधिकारी की उपलब्धि नहीं, बल्कि राजस्थान के कृषि विकास के इतिहास में एक ऐसा मील का पत्थर है, जो आने वाली पीढ़ी के अधिकारियों के लिए मार्गदर्शक का कार्य करेगा।

Pratahkal Bureau
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