जयपुर। राजधानी के मणिपाल हॉस्पिटल में डॉक्टरों की विशेषज्ञता और त्वरित निर्णय ने एक युवक को उम्रभर की अपंगता से बचाकर चिकित्सा जगत में सफलता की एक नई इबारत लिख दी है। जोगिया क्षेत्र में हुए एक भीषण सड़क हादसे में रक्षित बागड़ा नामक युवक न केवल गंभीर रूप से घायल हुआ, बल्कि उसके पैर की मुख्य रक्त वाहिनी धमनी (आर्टरी) पूरी तरह कट जाने से उसका पैर हमेशा के लिए गंवाने का खतरा पैदा हो गया था। लेकिन डॉ. गोविंद प्रसाद दुबे के साहसिक निर्णय और रात भर चली जटिल सर्जरी ने इस नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया।

घटनाक्रम के अनुसार, बीती 04 जनवरी को सुबह लगभग 11 बजे रक्षित एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पैर की हड्डी चकनाचूर होने के साथ ही रक्त की आपूर्ति करने वाली प्रमुख नस भी कट गई। आनन-फानन में परिजन उसे एक स्थानीय ऑर्थो सेंटर लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हाथ खड़े कर दिए। वहां के विशेषज्ञों ने स्पष्ट कर दिया कि रक्त संचार बंद होने के कारण पैर काटने की नौबत आ सकती है। संकट की इस घड़ी में परिजनों ने वरिष्ठ वेस्कुलर सर्जन डॉ. गोविंद प्रसाद दुबे से संपर्क साधा, जिन्होंने स्थिति की नजाकत को समझते हुए बिना एक पल गंवाए मरीज को तत्काल मणिपाल हॉस्पिटल, जयपुर लाने का निर्देश दिया।

रात लगभग 8 बजे जब रक्षित को अस्पताल लाया गया, तब तक काफी समय बीत चुका था और पैर को बचाना एक बड़ी चुनौती थी। डॉ. गोविंद प्रसाद दुबे ने बिना विलंब किए मेडिकल टीम के साथ मोर्चा संभाला और पूरी रात चले इस अत्यंत जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। अत्याधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञ कौशल के मेल से कटी हुई धमनी को जोड़कर पैर में रक्त का प्रवाह पुनः सुचारू किया गया। सूरज की पहली किरण के साथ ही यह सुखद खबर आई कि रक्षित का पैर अब पूरी तरह सुरक्षित है।

मणिपाल हॉस्पिटल के डायरेक्टर श्री रंजन ठाकुर ने इस चुनौतीपूर्ण मिशन की सफलता पर मेडिकल टीम की पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा कि अस्पताल की विशेषज्ञ टीम आपातकालीन स्थितियों में भी विश्वस्तरीय और समयबद्ध उपचार प्रदान करने के लिए पूरी तरह समर्पित है। वहीं, रक्षित के परिजनों ने डॉ. दुबे और अस्पताल प्रबंधन का आभार जताते हुए कहा कि यदि समय पर सही परामर्श और इलाज न मिलता, तो आज उनके बेटे का जीवन अंधकारमय हो जाता। यह सफल सर्जरी न केवल अस्पताल की उत्कृष्टता को दर्शाती है, बल्कि उन मरीजों के लिए एक उम्मीद की किरण भी है जो गंभीर हादसों में अपना अंग खोने की कगार पर होते हैं।

Pratahkal Newsroom

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