जयपुर में 22 और 23 अक्टूबर को लगेगा दीपावली उत्सव, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की होगी प्रदर्शनी
जयपुर में 22 और 23 अक्टूबर 2026 को जिला उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र में दीपावली उत्सव आयोजित होगा। सुबह 10 से शाम 7:30 बजे तक चलने वाली प्रदर्शनी में बगरू-सांगानेर प्रिंट, बंधेज, ब्लू पॉटरी, कुंदन-मीना ज्वेलरी और पारंपरिक उत्पाद प्रदर्शित होंगे।

जयपुर में दीपावली के अवसर पर स्थानीय हस्तशिल्पियों और बुनकरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विपणन का अवसर मिलेगा। जिला उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र, जयपुर की ओर से 22 और 23 अक्टूबर 2026 को 22 गोदाम इंडस्ट्रियल एरिया स्थित जिला उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र परिसर में हस्तशिल्प एवं हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी ‘दीपावली उत्सव’ आयोजित किया जाएगा। प्रदर्शनी सुबह 10 बजे से शाम 7:30 बजे तक चलेगी।
महाप्रबंधक, जिला उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र, जयपुर (शहर), डॉ. अनुकृति सिंह ने बताया कि प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य जयपुर के हस्तशिल्पियों और बुनकरों द्वारा निर्मित उत्कृष्ट उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना, उनकी कला एवं कौशल को प्रोत्साहित करना और आमजन में स्वदेशी उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस आयोजन के माध्यम से ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
दीपावली उत्सव में जयपुर के हस्तशिल्पियों और बुनकरों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न आकर्षक एवं पारंपरिक उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। इनमें बगरू और सांगानेर ब्लॉक प्रिंट की साड़ियां एवं सूट, बंधेज, ब्लू पॉटरी उत्पाद, कुंदन-मीना कारी की ज्वेलरी, लकड़ी के हस्तशिल्प उत्पाद, तारकशी, पेंटिंग, मिट्टी के बर्तन तथा पारंपरिक घरेलू सजावट और पूजा सामग्री शामिल हैं।
प्रदर्शनी के जरिए हस्तशिल्पियों और बुनकरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन के साथ उनके विपणन का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही आमजन को भारतीय हस्तकला और पारंपरिक उत्पादों से जुड़ने का अवसर भी प्राप्त होगा। आयोजन का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ उनकी कला और कौशल को प्रोत्साहित करना है।
महाप्रबंधक डॉ. अनुकृति सिंह ने आमजन से अपील की है कि वे अपने परिवारजनों के साथ दीपावली उत्सव में अधिकाधिक संख्या में भाग लें। उन्होंने स्थानीय हस्तशिल्पियों और बुनकरों द्वारा निर्मित उत्पादों के विपणन को प्रोत्साहित करने तथा भारतीय कला, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण में योगदान देने का आह्वान किया है।

