जयपुर में शिल्प कला महोत्सव का भव्य समापन: 950 महिलाओं के स्वावलंबन की नई इबारत
जयपुर नगर निगम ग्रेटर द्वारा आयोजित 58 दिवसीय 'शिल्प कला महोत्सव' का भव्य समापन हुआ। सचिव संजीव वर्मा के निर्देशन में आयोजित इस मेले से 95 स्वयं सहायता समूहों की लगभग 950 महिलाओं को सीधा आर्थिक लाभ मिला। स्वावलंबन और महिला सशक्तिकरण की इस अनूठी पहल ने जयपुर में आजीविका के नए द्वार खोले हैं, जिससे महिलाओं ने अपने परिवार को सुदृढ़ आर्थिक सहारा प्रदान किया है।

जयपुर। राजस्थान की गुलाबी नगरी में नारी शक्ति के हुनर और स्वावलंबन का प्रतीक बना 'शिल्प कला महोत्सव' आज अपनी स्वर्णिम यादों के साथ संपन्न हो गया। गत 14 नवंबर 2025 से शुरू हुआ यह उत्सव आज 10 जनवरी 2026 को पूरे 58 दिनों के सफल सफर के बाद एक भव्य समापन समारोह के साथ संपन्न हुआ। जयपुर नगर निगम ग्रेटर के शहरी आजीविका केंद्र संस्थान द्वारा आयोजित इस मेले ने न केवल हस्तशिल्प को मंच दिया, बल्कि सैकड़ों परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग भी प्रशस्त किया।
संस्थान के मीडिया मैनेजर श्री जिनेश कुमार जैन ने आयोजन की सफलता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह संपूर्ण महोत्सव संस्थान के सचिव श्री संजीव वर्मा के कुशल निर्देशन और सटीक प्रबंधन का परिणाम रहा। उनके नेतृत्व में मेले ने अपनी भव्यता और उद्देश्यों को कुशलतापूर्वक प्राप्त किया। इस आयोजन की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसने दो महीनों तक शहर के सांस्कृतिक और व्यापारिक परिवेश में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाए रखी।
मेले के तकनीकी और जमीनी प्रबंधन की जानकारी साझा करते हुए एस.एच.जी. कोऑर्डिनेटर श्रीमती रजनी मिरवाल ने बताया कि इस महोत्सव में कुल 95 महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) ने पूरे उत्साह के साथ भागीदारी की। यदि आंकड़ों के जरिए इस प्रभाव को समझें, तो प्रत्येक समूह में लगभग 10 महिलाओं की सक्रियता के चलते कुल 950 महिला परिवारों को इस मेले के माध्यम से सीधा आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ है। यह आयोजन केवल एक प्रदर्शनी मात्र नहीं था, बल्कि उन महिलाओं के लिए एक ठोस आजीविका का जरिया बना जो अपने घरों से निकलकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं।
समापन के अवसर पर उपस्थित अतिथियों और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने इस मंच की सराहना करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण का एक जीवंत उदाहरण बताया। मेले में शामिल कई महिलाओं ने भावुक होते हुए साझा किया कि इस आयोजन से हुई आय उनके जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आई है। किसी ने इस आय से अपने बच्चों की स्कूल फीस भरी, तो किसी ने अपने घरेलू खर्चों और जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा किया। यह महोत्सव महिलाओं के लिए स्वरोजगार, स्वावलंबन और परिवार की आर्थिक सुदृढ़ता का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।
समाज के विभिन्न वर्गों ने महिलाओं के रोजगार को बढ़ावा देने के इस सार्थक प्रयास की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान आर्थिक परिवेश में इस प्रकार के आयोजन न केवल आवश्यक हैं, बल्कि अनिवार्य भी हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागी महिलाओं ने शहरी आजीविका केंद्र संस्थान के पदाधिकारियों और पूरी सहयोगी टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया। महिलाओं ने सामूहिक रूप से निवेदन किया कि भविष्य में भी वर्षभर ऐसे मेलों का आयोजन किया जाना चाहिए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विक्रय के लिए एक स्थायी एवं सशक्त मंच मिलता रहे, जिससे उनकी आजीविका निरंतर सुचारु रूप से चल सके।

