जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आज भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय का माहौल काफी गहमागहमी भरा रहा, जहां सरकार और संगठन के बीच समन्वय की एक जीवंत तस्वीर देखने को मिली। प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित 'कार्यकर्ता सुनवाई' के दौरान जनसमस्याओं के अंबार के बीच सहकारिता मंत्री गौतम दक ने मीडिया से मुखातिब होते हुए न केवल सरकार की उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया, बल्कि विपक्षी दल कांग्रेस की कार्यशैली पर भी जमकर प्रहार किए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा सरकार जनता और कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संवाद के माध्यम से समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए पूरी तरह संकल्पित है।

आज की इस सुनवाई में प्रदेश के विभिन्न कोनों से आए कार्यकर्ताओं और आमजन ने करीब 70 से अधिक परिवाद मंत्री के समक्ष रखे। मंत्री गौतम दक ने बेहद संजीदगी के साथ एक-एक व्यक्ति की बात सुनी। इस दौरान मुख्य रूप से प्रशासनिक तबादलों, भूखंड विवादों और विभिन्न सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली से जुड़ी शिकायतें सामने आईं। मंत्री ने सक्रियता दिखाते हुए मौके पर ही उन समस्याओं का निस्तारण किया जिनका त्वरित समाधान संभव था, जबकि शेष जटिल मामलों को उचित कार्यवाही के लिए संबंधित विभागों को अग्रसारित कर दिया गया। इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान उनके साथ प्रदेश मंत्री अपूर्वा सिंह भी मौजूद रहीं, जो संगठन की सक्रियता को दर्शाती हैं।

मीडिया से संवाद करते हुए गौतम दक ने कांग्रेस के शासनकाल और वर्तमान भाजपा सरकार के बीच की एक गहरी लकीर खींचते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार पांच साल तक जनसंपर्क से कटी रही और संकट के समय होटलों में बंद रही। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के उस बयान को भी याद दिलाया जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि वे दो साल तक घर से बाहर नहीं निकले थे। इसके विपरीत, मंत्री ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सक्रियता का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के लगभग हर जिले का प्रवास कर आमजन की नब्ज टटोली है। उन्होंने कहा कि सरकार अब अपने तीसरे बजट की तैयारियों में जुटी है, जिसमें समाज के हर वर्ग और समुदाय के सुझावों को प्राथमिकता दी जा रही है।

एसआईआर (SIR) और मनरेगा को लेकर कांग्रेस द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों को गौतम दक ने महज एक राजनीतिक स्वांग करार दिया। उन्होंने कानूनी और प्रक्रियात्मक बारीकियों को स्पष्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस बेवजह जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है जो बिना किसी राजनीतिक दबाव के अपने विवेक से कार्य करती है। एसआईआर की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और अभी केवल आपत्तियों का दौर चल रहा है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि किसी का नाम सूची से हटा है, तो वह प्रमाणों के साथ उसे पुनः जुड़वा सकता है। उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रारंभिक प्रक्रिया पर सवाल उठाना यह दर्शाता है कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। यह कार्यक्रम न केवल जनसुनवाई का माध्यम बना, बल्कि इसने आगामी राजनीतिक संघर्षों की दिशा भी तय कर दी है।

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