राजस्थान नर्सेज का आंदोलन जारी: बहाली और मुआवजे की मांग को लेकर तीसरे दिन भी गूंजे नारे
राजस्थान में नर्सेज का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी है। 2000 संविदा नर्सेज की बहाली और दिवंगत साथी के परिवार को मुआवजे की मांग को लेकर प्रदेश के 18 जिलों में आक्रोश। क्या सरकार जागेगी? जानें पूरी खबर और संघर्ष की स्थिति।

जयपुर के जनाना अस्पताल में संविदा नर्सेज अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए।
जयपुर, 15 जून। राजस्थान के चिकित्सा जगत में सरकार के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है। राजस्थान नर्सेज संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेश भर में संविदा नर्सेज का आंदोलन आज तीसरे दिन भी पूरे वेग के साथ जारी रहा। सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज के द्वार पर धरने पर बैठे नर्सेज का कहना है कि उनकी मांगें पूरी होने तक यह संघर्ष थमने वाला नहीं है।
आंदोलन का मुख्य कारण हाल ही में मृत्तक संविदा नर्स दीपक के आश्रितों को उचित मुआवजा और सरकारी नौकरी प्रदान करने की मांग, और इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न जिलों से वर्षो से कार्यरत लगभग 2000 संविदा नर्सेज को अचानक और कथित तौर पर अवैध तरीके से सेवा से हटाए जाने का विरोध है। सरकार के इस निर्णय को लेकर नर्सेज में भारी रोष है।
इस कड़ी में, जनाना चिकित्सालय में आज सुबह 8 से 10 बजे तक नियमित और अनियमित नर्सेज ने एकजुट होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। संयोजक देवेंद्र पंथ, विनीता शेखावत, लुसी डेविड और राकेश यादव के नेतृत्व में नर्सेज ने सरकार की संवेदनहीनता के खिलाफ नारेबाजी की। संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक नरेंद्र सिंह शेखावत, जेपी कस्वां, कैलाश शर्मा और जितेंद्र कटारा ने स्पष्ट किया कि नर्सेज की यह लड़ाई अपने अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा के लिए है। आगामी रणनीति के तहत, मनोचिकित्सालय के नर्सेज मंगलवार को राकेश शर्मा और लोकेश कुमार के नेतृत्व में जनाना चिकित्सालय में प्रातः 8 बजे से विरोध प्रदर्शन करेंगे।
प्रांतीय संघर्ष संयोजक राजेंद्र राना, पवन मीना और गुड्डी सैनी ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि झालावाड़, अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा और दौसा सहित प्रदेश के लगभग 18 जिलों में विरोध प्रदर्शन का सिलसिला जारी है, बावजूद इसके चिकित्सा विभाग के उच्चाधिकारियों की ओर से अब तक कोई ठोस सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है, जो अत्यंत खेदजनक है। आज के प्रदर्शन में सोम सिंह मीणा, विमल मीना, राहुल शर्मा, सुनील शर्मा और हेमंत सहित संघर्ष समिति के कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे। यह आंदोलन सरकार की नीतियों के खिलाफ नर्सेज की बढ़ती एकजुटता और उनके संकल्प को दर्शाने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

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