जयपुर: मुख्यमंत्री का संकल्प—आधी आबादी की भागीदारी से ही 'विकसित राजस्थान' का सपना होगा साकार
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में महिला प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व संवाद किया। उन्होंने बजट 2026-27 के लिए महिलाओं के सुझावों को नीतिगत आधार बनाने और महिला सशक्तिकरण को 'विकसित राजस्थान' का मुख्य केंद्र घोषित किया है। लाडो प्रोत्साहन और लखपति दीदी जैसी योजनाओं के माध्यम से आधी आबादी को आत्मनिर्भर बनाने की इस विशेष रिपोर्ट को पढ़ें।

जयपुर, 13 जनवरी। राजस्थान की प्रगति के पथ पर महिलाओं को सारथी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने महिला सशक्तिकरण को राज्य सरकार की नीतियों का केंद्रबिंदु घोषित किया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित 'बजट पूर्व संवाद' के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जब तक प्रदेश की प्रत्येक महिला शिक्षित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर नहीं होगी, तब तक 'विकसित राजस्थान' की परिकल्पना को पूर्ण नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस संवाद को केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि प्रदेश की आधी आबादी की आकांक्षाओं को आगामी बजट 2026-27 का आधार बनाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाएं समाज में सकारात्मक बदलाव की सबसे सशक्त वाहक हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के उस विजन को दोहराया जिसमें महिला, युवा, किसान और गरीब को राष्ट्र के उत्थान के चार प्रमुख स्तंभ माना गया है। श्री शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार हर वर्ग के सुझावों को नीतियों में समाहित कर रही है ताकि शासन में जन-जन की सहभागिता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने आश्वस्त किया कि आज मिले महत्वपूर्ण सुझावों को आगामी बजट में प्राथमिकता के साथ शामिल किया जाएगा, जिससे महिलाएं स्वावलंबन की नई इबारत लिख सकेंगी।
महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने जनकल्याणकारी योजनाओं की उपलब्धियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि लाडो प्रोत्साहन योजना के तहत वित्तीय सहायता को 1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये किया गया है, जिसका सीधा लाभ 4 लाख 60 हजार बालिकाओं को मिल रहा है। इसी प्रकार, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत राशि बढ़ाकर 6 हजार 500 रुपये करने से प्रदेश की 10 लाख गर्भवती महिलाओं को संबल मिला है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में 'मा वाउचर योजना' के माध्यम से 2 लाख 26 हजार महिलाओं को निःशुल्क सोनोग्राफी की सुविधा प्रदान की गई है, जो महिला स्वास्थ्य के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
आर्थिक सशक्तिकरण का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ बताया कि प्रदेश में 19 लाख से अधिक महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर 12 लाख से अधिक 'लखपति दीदी' बनाई गई हैं, जो अब 'मिलेनियर दीदी' बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रही हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए दुग्ध उत्पादकों को 5 रुपये प्रति लीटर का अनुदान दिया जा रहा है। कानून-व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया कि पूर्ववर्ती सरकार के अंतिम दो वर्षों की तुलना में वर्तमान कार्यकाल में अपराधों में 12 प्रतिशत की कमी आई है, जो सुरक्षित वातावरण की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
इस महत्वपूर्ण संवाद के दौरान उपस्थित महिला प्रतिनिधियों ने स्वरोजगार, कौशल विकास और शिक्षा जैसे विषयों पर अपने बहुमूल्य सुझाव दिए और सरकार के प्रयासों की सराहना की। इस उच्च स्तरीय बैठक में उपमुख्यमंत्री श्रीमती दिया कुमारी, मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास, प्रमुख शासन सचिव (वित्त) श्री वैभव गालरिया और प्रमुख शासन सचिव (महिला एवं बाल विकास) श्री भवानी सिंह देथा सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। यह संवाद इस विश्वास के साथ संपन्न हुआ कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और सरकार की समावेशी नीतियां राजस्थान को देश का उत्कृष्ट राज्य बनाने में निर्णायक सिद्ध होंगी।

Pratahkal Bureau
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