जयपुर। राजस्थान की राजधानी में शनिवार को सत्ता के गलियारों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक की गूंज सुनाई दी, जब मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने ग्राम पंचायतों के निवर्तमान सरपंचों के साथ एक सीधा और भावनात्मक संवाद किया। मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में प्रदेश के सातों संभागों से आए प्रशासकों (निवर्तमान सरपंचों) को संबोधित करते हुए श्री शर्मा ने स्पष्ट किया कि राजस्थान की प्रगति का मार्ग केवल गांवों की गलियों से होकर ही गुजरता है। उन्होंने सरपंचों को लोकतंत्र की पहली सीढ़ी और गांव की बुलंद आवाज करार देते हुए कहा कि राज्य सरकार ‘सबका साथ-सबका विकास’ के मूल मंत्र के साथ हर ग्रामीण को सशक्त बनाने के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर न केवल सरपंचों के महत्व को रेखांकित किया, बल्कि भ्रष्टाचार मुक्त और जवाबदेह पंचायतीराज व्यवस्था की एक नई रूपरेखा भी जनता के सामने रखी।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में गहराई से इस बात पर जोर दिया कि सरपंच कोई महज प्रशासनिक पद नहीं है, बल्कि यह सेवा और अटूट संकल्प का एक माध्यम है। उन्होंने कहा कि गांव का किसान हो या मजदूर, जब उसे किसान सम्मान निधि, पेंशन, पेयजल, बिजली, आवास या स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों की दरकार होती है, तो उसकी पहली उम्मीद सरपंच ही होता है। शासन की योजनाओं का लाभ धरातल पर किस सीमा तक पहुंच रहा है, इसका सबसे सटीक फीडबैक एक सरपंच ही दे सकता है। इसी जमीनी हकीकत को समझते हुए राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों के सुदृढ़ीकरण के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। श्री शर्मा ने जानकारी दी कि प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के पुनर्गठन के तहत 85 नई पंचायत समितियां और 3 हजार 417 नई ग्राम पंचायतें बनाई गई हैं, जबकि 8 नवगठित जिलों में नई जिला परिषदों का गठन कर प्रशासनिक ढांचे को जनता के करीब लाया गया है।

ग्रामीण विकास के इस महायज्ञ में मुख्यमंत्री ने भविष्य की योजनाओं का खाका भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि हर ग्राम पंचायत पर 'अटल ज्ञान केंद्र' की स्थापना की जाएगी और पंचायत भवनों का नवीनीकरण कर उन्हें आधुनिक बनाया जाएगा। रोजगार के मोर्चे पर उन्होंने केंद्र सरकार के 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' का उल्लेख करते हुए इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया रोडमैप बताया। वहीं प्रदेश स्तर पर युवाओं को पेपरलीक के दंश से मुक्ति दिलाते हुए 1 लाख से अधिक सरकारी नियुक्तियां देने और आगामी 1 लाख 44 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी रहने की बात कही। महिला सशक्तीकरण के लिए लाड़ो प्रोत्साहन योजना और पशुपालकों के लिए मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना जैसे कदमों को उन्होंने सामाजिक उत्थान का आधार बताया।

संवाद कार्यक्रम के दौरान उपस्थित निवर्तमान सरपंचों ने आगामी बजट और विकास कार्यों को लेकर अपने महत्वपूर्ण सुझाव मुख्यमंत्री के समक्ष रखे, जिस पर श्री शर्मा ने सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में विधायक श्री शत्रुघ्न गौतम और राजस्थान सरपंच संघ के प्रदेशाध्यक्ष श्री बंशीधर गढ़वाल सहित भारी संख्या में ग्रामीण जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने अंत में सभी प्रशासकों से आह्वान किया कि वे सरकारी योजनाओं की जानकारी को समाज की अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति तक पहुंचाएं। यह संवाद केवल एक औपचारिक भेंट नहीं थी, बल्कि राजस्थान के गांवों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार की दूरगामी सोच का प्रतिबिंब बनकर उभरी है।

Pratahkal Bureau

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