जयपुर। राजस्थान की धरा पर स्वास्थ्य सेवाओं को मात्र एक सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना का सर्वोच्च क्षेत्र मानते हुए मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश को चिकित्सा क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने का शंखनाद किया है। शुक्रवार को जयपुर स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित 'चिकित्सा और स्वास्थ्य' विषय पर बजट पूर्व संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार संसाधनों की कोई कमी नहीं रहने देगी, क्योंकि उनका लक्ष्य राजस्थान की 8 करोड़ जनता को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान करना है। 'पहला सुख निरोगी काया' के प्राचीन शास्त्रोक्त आदर्श को ध्येय वाक्य मानते हुए उन्होंने विश्वास दिलाया कि आगामी बजट जन-आकांक्षाओं के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण पर केंद्रित होगा।

बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना आज संपूर्ण राष्ट्र के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन चुकी है, जिसके अंतर्गत अब तक 37 लाख से अधिक मरीजों को करीब 7 हजार 300 करोड़ रुपये का कैशलेस इलाज मुहैया कराया गया है। उन्होंने प्रदेशवासियों को गांव-ढाणी तक गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के तहत राजस्थान आज औषधियां और सर्जिकल उपकरण उपलब्ध कराने में देश में प्रथम स्थान पर है। चिकित्सा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विस्तार की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि विगत दो वर्षों में 7 उप जिला अस्पताल और 2 सैटेलाइट अस्पतालों सहित कुल 14 संस्थानों का जिला चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन किया गया है। वहीं, प्रदेश के 8 हजार 700 चिकित्सा संस्थानों को 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' के रूप में परिवर्तित कर अंतिम छोर तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष बल देते हुए कहा कि 7 नए मेडिकल कॉलेजों की शुरुआत और 15 नवीन कॉलेजों के निर्माणाधीन होने से प्रदेश को उच्च शिक्षित स्वास्थ्यकर्मी मिलेंगे। इस दौरान उन्होंने भीलवाड़ा, धौलपुर, प्रतापगढ़, नाथद्वारा और बूंदी में स्थापित नर्सिंग कॉलेजों तथा जिला आयुष चिकित्सालयों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। स्वास्थ्य कर्मियों को ईमानदारी और निष्ठा की सीख देते हुए मुख्यमंत्री ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी कि जहाँ सेवाभावी कार्मिकों का सम्मान होगा, वहीं स्वास्थ्य योजनाओं में अनियमितता बरतने वालों और जनता के पैसे का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

इस महत्वपूर्ण संवाद के दौरान उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने भी क्षेत्र की चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर विमर्श किया। बैठक में मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास, मुख्यमंत्री कार्यालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अखिल अरोरा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ और वित्त विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री वैभव गालरिया सहित शासन के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। चर्चा में आईएलबीएस हॉस्पिटल, नारायणा हरदयाल ग्रुप, महावीर विकलांग सेवा समिति, इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन, यूनीसेफ, महात्मा गांधी हॉस्पिटल, आईएमए राजस्थान, एसएमएस मेडिकल कॉलेज और आरयूएचएस के प्रतिनिधियों ने अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने सभी विशेषज्ञों को आश्वस्त किया कि उनके सुझावों को आगामी बजट में प्राथमिकता के साथ शामिल किया जाएगा, ताकि राजस्थान स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सिरमौर बनकर उभरे।

Pratahkal Newsroom

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