जयपुर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आह्वान, विकसित राजस्थान के निर्माण में एनजीओ और सिविल सोसायटी की भागीदारी अनिवार्य
जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बजट पूर्व संवाद में एनजीओ और सिविल सोसायटी के साथ विकसित राजस्थान का रोडमैप साझा किया। मुख्यमंत्री ने 'वीबी-जी राम जी' अधिनियम और सुशासन के दो वर्षों की उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए दिव्यांग, घुमंतू और ग्रामीण विकास पर सुझाव मांगे। आगामी बजट को जन-हितैषी बनाने की दिशा में यह एक निर्णायक कदम है।

जयपुर, 11 जनवरी। राजस्थान की विकास यात्रा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और आगामी बजट को जन-आकांक्षाओं के अनुरूप ढालने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को एक महत्वपूर्ण पहल की। मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित ‘बजट पूर्व संवाद’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एनजीओ, सिविल सोसाइटी और उपभोक्ता फोरम के प्रतिनिधियों से सीधे मुखातिब होते हुए स्पष्ट किया कि सामाजिक संगठन केवल सेवा का माध्यम नहीं, बल्कि जनता की इच्छाओं की अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त मंच हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन संस्थाओं के अनुभव और धरातलीय सुझाव न केवल जनकल्याण को नई दिशा देंगे, बल्कि सरकार की योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में एक सेतु का कार्य करेंगे।
संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार की दूरगामी नीतियों का उल्लेख करते हुए ग्रामीण विकास की नई रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया 'विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025' (वीबी-जी राम जी) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तकनीकी रूप से सुदृढ़ करने और मनरेगा जैसी योजनाओं में पारदर्शिता लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। श्री शर्मा ने गौरव के साथ साझा किया कि पिछले दो वर्षों में उनकी सरकार ने सेवा और सुशासन के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जिसमें शहरी और ग्रामीण सेवा शिविरों के माध्यम से समस्याओं का त्वरित समाधान और राजकीय विद्यालयों में छात्रों के लिए नेत्र जांच शिविर जैसे संवेदनशील निर्णय शामिल हैं।
इस वैचारिक मंथन में प्रदेश की विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और सामाजिक न्याय से लेकर पर्यावरण संरक्षण तक के गंभीर विषयों पर अपने विचार साझा किए। जिला दिव्यांग सेवा संस्थान (जालोर), अर्पण सेवा संस्थान, घुमंतू कल्याण संस्थान, प्रयास संस्थान, कट्स संस्थान, एसडब्ल्यूआरसी तिलोनिया, सेन्ट्रल फॉर डवलपमेंट कम्यूनिकेशन जयपुर, अपना घर आश्रम, टाबर संस्थान, सक्षम संस्थान, सिविल राईट सोसायटी, श्रीमती शांति देवी जनकल्याण ट्रस्ट, अलख फाउंडेशन, चौथमल पुजारी चैरिटेबल ट्रस्ट, कन्ज्यूमर एक्शन एण्ड नेटवर्क, जनाधिकार समिति और सेन्टर फॉर दलित राईट्स के प्रतिनिधियों ने दिव्यांग कल्याण, महिला सशक्तीकरण, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और पुनर्वास केंद्रों की बेहतरी के लिए ठोस सुझाव दिए।
प्रतिनिधियों ने पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में लिए गए साहसिक निर्णयों की मुक्त कंठ से सराहना की। मुख्यमंत्री ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वस्त किया कि इन प्रस्तावों का सूक्ष्म विश्लेषण कर इन्हें आगामी बजट में प्राथमिकता के साथ शामिल किया जाएगा। इस ऐतिहासिक संवाद के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय श्री अखिल अरोड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव ग्रामीण विकास श्रीमती श्रेया गुहा और प्रमुख शासन सचिव वित्त श्री वैभव गालरिया सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जो इस बात का प्रमाण है कि राजस्थान सरकार आगामी बजट को समावेशी और जन-केंद्रित बनाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।

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