जयपुर। राजस्थान की पावन धरा पर 'विकसित राजस्थान' के संकल्प को साकार करने की दिशा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संवेदनशीलता और सुशासन का एक नया अध्याय लिख दिया है। समाज के उस अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा में लाने का सपना, जो कभी फाइलों में दबा रहता था, अब धरातल पर साकार हो रहा है। जयपुर से उठी यह कल्याणकारी लहर पूरे प्रदेश के वंचित तबकों को आर्थिक संबल प्रदान कर उन्हें न केवल आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि 'रोजगार मांगने वाले' के बजाय 'रोजगार देने वाला' बनने की शक्ति भी दे रही है। अंत्योदय की इसी पावन भावना को केंद्र में रखकर राज्य सरकार ने रियायती ऋण और कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से अनुसूचित जाति, जनजाति, सफाई कर्मचारी और दिव्यांगजनों के जीवन में खुशहाली का नया सवेरा लाने का बीड़ा उठाया है।

इस ऐतिहासिक अभियान की बागडोर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधीन राजस्थान अनुसूचित जाति, जनजाति वित्त एवं विकास सहकारी निगम लिमिटेड ने संभाल रखी है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के विजन को अमलीजामा पहनाते हुए निगम ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश के 1 हजार 381 लाभार्थियों को लगभग 20 करोड़ रुपये के रियायती ब्याज दर पर ऋण स्वीकृत किए गए हैं। इस बड़ी पहल का सीधा प्रभाव उन परिवारों पर पड़ा है जो आर्थिक अभाव के कारण अपने हुनर को व्यवसाय में नहीं बदल पा रहे थे। मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है कि अनुसूचित जाति के 671 लाभार्थियों को 7.52 करोड़ रुपये, अनुसूचित जनजाति के 325 पात्रों को 3.25 करोड़ रुपये, और समाज के अभिन्न अंग 106 सफाई कर्मियों को 3.81 करोड़ रुपये का आर्थिक संबल प्रदान किया गया है। साथ ही, 51 दिव्यांगजनों के लिए 58.08 लाख रुपये की राशि स्वीकृत कर सरकार ने यह सिद्ध कर दिया है कि शारीरिक बाधाएं अब प्रगति के मार्ग में रोड़ा नहीं बनेंगी।

भविष्य की तैयारियों को लेकर भी सरकार की सक्रियता देखते ही बनती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया न केवल पूर्ण हो चुकी है, बल्कि जनता का विश्वास इस कदर बढ़ा है कि निर्धारित 3 हजार 470 लक्ष्यों के मुकाबले 15 हजार 635 आवेदन प्राप्त हुए हैं। जनवरी 2026 के इस दौर में अब जिला स्तरीय ऋण चयन समितियों द्वारा साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिसके बाद डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित कर दी जाएगी। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों के माध्यम से भी ऋण दिलाने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, जहाँ अनुसूचित जाति उप-योजना के तहत 2 हजार 670 व्यक्तियों को बैंकों से जोड़ा जा चुका है। प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के तहत भी प्रोजेक्ट लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान देकर सरकार ने लाभार्थियों के जोखिम को न्यूनतम कर दिया है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की यह पहल केवल एक वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि प्रदेश के वंचित वर्गों के प्रति अटूट संवेदना और उनके सशक्तिकरण का जीवंत प्रमाण है।

Pratahkal Newsroom

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