जयपुर। गुलाबी नगरी जयपुर ने आज पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नया इतिहास रच दिया है, जहाँ नारी शक्ति के सामूहिक संकल्प ने 'सर्कुलर इकोनॉमी' के विजन को एक नई ऊंचाई प्रदान की। सुरेश ज्ञानविहार विश्वविद्यालय के प्रांगण में आयोजित ‘मिशन लाइफ के माध्यम से सर्कुलर इकोनॉमी’ कार्यक्रम महज एक आयोजन नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षित पीढ़ी के लिए एक महा-अभियान की शुरुआत बनकर उभरा। इस भव्य समागम में जयपुर की 850 से अधिक महिलाओं ने एक सुर में रीसाइक्लिंग मिशन को आत्मसात करने और अपशिष्ट प्रबंधन को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की शपथ ली, जिससे पूरा परिसर गूँज उठा।

यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम मैटेरियल रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MRAI), भारत सरकार के ‘मिशन लाइफ’ और सुरेश ज्ञानविहार विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की गंभीरता और इसकी वैश्विक प्रासंगिकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यावरण विशेषज्ञों ने शिरकत की। एमआरएआई (MRAI) के अध्यक्ष श्री संजय मेहता ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी ही वह एकमात्र मार्ग है जिससे हम संसाधनों के दोहन को रोककर प्रकृति के साथ संतुलन बिठा सकते हैं। उनके संबोधन ने उपस्थित महिलाओं को कचरे से कंचन बनाने की दिशा में प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण साझा करते हुए आरईएमए (REMA) की अध्यक्ष सुश्री रोबिल वीनर ने रीसाइक्लिंग के वैश्विक मानकों और महिलाओं की इसमें भागीदारी को रेखांकित किया। उनके साथ मंच पर सुरेश ज्ञानविहार विश्वविद्यालय और मिशन लाइफ के कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे, जिन्होंने आधुनिक जीवनशैली में बदलाव लाकर पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु यह रहा कि कैसे घरेलू स्तर पर अपशिष्ट प्रबंधन करके एक बड़े आर्थिक और पर्यावरणीय परिवर्तन की नींव रखी जा सकती है।

समापन सत्र तक पहुँचते-पूँछते यह कार्यक्रम एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका था। 850 से अधिक महिलाओं द्वारा लिया गया यह रीसाइक्लिंग संकल्प न केवल जयपुर के कूड़ा प्रबंधन के आंकड़ों को सुधारेगा, बल्कि आने वाले समय में सर्कुलर इकोनॉमी के मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जब समुदाय की महिलाएं इस तरह के मिशन से जुड़ती हैं, तो उसका प्रभाव सीधे समाज की जड़ों तक पहुँचता है। जयपुर का यह कदम पर्यावरण स्थिरता की वैश्विक लड़ाई में भारत की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।

Pratahkal Newsroom

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