जयपुर: स्वास्थ्य सेवाओं की सुदृढ़ता के लिए रणनीतिक निवेश और डिजिटल क्रांति का आह्वान
जयपुर में आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट डॉ. पी. आर. सोडानी ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए सार्वजनिक व्यय में वृद्धि और डिजिटल परिवर्तन का आह्वान किया। उन्होंने प्रतिभा विकास और रणनीतिक निवेश को स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती के लिए अनिवार्य बताते हुए आम जनता पर आर्थिक बोझ कम करने और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर जोर दिया, ताकि स्वास्थ्य प्रबंधन अधिक प्रभावी और उत्तरदायी बन सके।

जयपुर, 9 जनवरी, 2026: राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित प्रतिष्ठित आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट डॉ. पी. आर. सोडानी ने देश की स्वास्थ्य प्रणाली को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि यदि भारत को अपनी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप सशक्त बनाना है, तो इसके लिए केवल निवेश ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि एक लक्षित, निरंतर और रणनीतिक दृष्टिकोण की अनिवार्य आवश्यकता है। डॉ. सोडानी के अनुसार, स्वास्थ्य क्षेत्र की उन्नति के लिए प्रतिभा विकास, डिजिटल परिवर्तन और बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण वे तीन मुख्य स्तंभ हैं, जिन पर पूरी व्यवस्था टिकी हुई है।
इस महत्वपूर्ण विमर्श के दौरान डॉ. पी. आर. सोडानी ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि की वकालत करते हुए कहा कि इसका सीधा उद्देश्य आम जनता पर पड़ने वाले स्वास्थ्य सेवाओं के आर्थिक बोझ को कम करना होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा आवंटित बजट का उपयोग न केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण में हो, बल्कि उसे अत्यंत प्रभावी और रणनीतिक तरीके से मानव संसाधनों की क्षमता और दक्षता बढ़ाने में भी लगाया जाए। उनके दृष्टिकोण में, जब तक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन में लगे कर्मियों को उत्कृष्ट प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण का समर्थन नहीं मिलेगा, तब तक जमीनी स्तर पर सेवाओं में सुधार लाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य बना रहेगा।
डॉ. सोडानी ने आधुनिक युग की मांग को देखते हुए डिजिटल परिवर्तन (डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन) को स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि डिजिटल तकनीक को अपनाने से न केवल सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में सुधार होगा, बल्कि पूरी स्वास्थ्य प्रणाली अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और सक्षम बन सकेगी। इसके साथ ही, अनुसंधान एवं विकास (R&D) को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि योग्य प्रतिभाओं को सही मंच और संसाधन उपलब्ध कराने से नवाचार के नए द्वार खुलेंगे। डॉ. पी. आर. सोडानी का यह संबोधन न केवल वर्तमान स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान पेश करता है, बल्कि एक आत्मनिर्भर और स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण की दिशा में एक सशक्त और प्रेरणादायक आह्वान भी है।

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