जयपुर में पुलिसकर्मी की वर्दी पहनकर व्यापारी नरेन्द्र नाथ दत्ता के अपहरण और फिरौती मांगने के मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी करण आसवानी उर्फ कमल सिंधी को आखिरकार दुबई से गिरफ्तार कर लिया गया। रेड कॉर्नर नोटिस के बाद एजीटीएफ की लगातार निगरानी और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के समन्वय से आरोपी की लोकेशन ट्रेस हुई। अबू धाबी इंटरपोल की टीम द्वारा डिटेन किए जाने के बाद एजीटीएफ राजस्थान की टीम आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे भारत लेकर पहुंची। गुरुवार देर रात टीम आरोपी को लेकर जयपुर पहुंच गई।

यह कार्रवाई अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस एटीएस, एएनटीएफ और एजीटीएफ श्री दिनेश एमएन के निर्देशन में की गई। कार्रवाई का सुपरविजन उपमहानिरीक्षक पुलिस श्री योगेश यादव और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सिद्धांत शर्मा ने किया। उपाधीक्षक पुलिस श्री रविंद्र प्रताप, पुलिस निरीक्षक श्री सुनील जांगिड़ और श्री राम सिंह नाथावत सहित टीम ने आरोपी की तलाश, उसके आपराधिक नेटवर्क से जुड़ी जानकारी जुटाने और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पुलिस थाना खोह नागोरियान में 21 अगस्त 2025 को एफआईआर दर्ज की गई थी। परिवाद के अनुसार व्यापारी नरेन्द्र नाथ दत्ता 20 अगस्त 2025 को जयपुर स्थित अपने घर से वैशाली नगर जाने के लिए निकले थे। उनके साथ उनके परिचित तथा चालक भी थे। बाद में उनका मोबाइल बंद आने पर परिजनों को चिंता हुई। अगले दिन परिजनों को नरेन्द्र नाथ दत्ता के मोबाइल से फोन आया, जिसमें बताया गया कि उनका अपहरण कर लिया गया है और उन्हें छोड़ने के लिए फिरौती की रकम की व्यवस्था करने को कहा गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और अपहृत नरेन्द्र नाथ दत्ता तथा उनके चालक योगेश को दस्तयाब कर सुरक्षित छुड़ाया। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने हर्ष गौतम, कनक गांगुली और अजय बेनीवाल उर्फ शाका को गिरफ्तार किया। अनुसंधान में सामने आया कि आरोपियों ने पुलिसकर्मी की वर्दी पहनकर मिलकर नरेन्द्र नाथ दत्ता सहित अन्य व्यक्तियों का अपहरण किया और उन्हें अलग-अलग स्थानों पर बंधक बनाकर परिजनों से फिरौती की मांग की।

जांच के दौरान हर्ष गौतम के कब्जे से अपहृत व्यक्तियों की इनोवा क्रिस्टा बरामद की गई। वारदात में प्रयुक्त स्विफ्ट कार भी बरामद हुई। अनुसंधान में आरोपियों द्वारा आगरा एवं अन्य स्थानों पर अपहृत व्यक्तियों को बंधक बनाकर रखने की जानकारी सामने आई।

मामले की जांच में करण आसवानी की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने उसके संभावित ठिकानों पर तलाश की, लेकिन वह लगातार फरार मिला। जांच में यह भी सामने आया कि करण आसवानी संगठित अपराध के सिंडिकेट से जुड़ा हुआ था। अपहरण और फिरौती की वारदात में उसके साथ शामिल आरोपियों के विरुद्ध अपराध प्रमाणित पाया गया। पुलिस ने न्यायालय से उसके खिलाफ वारंट जारी करवाया। ठिकानों पर तलाश तेज होने के बाद सामने आया कि करण आसवानी देश छोड़कर भाग चुका है।

करण आसवानी के दुबई भागने की जानकारी मिलने के बाद एजीटीएफ ने उसकी तलाश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाई। आरोपी के विरुद्ध रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने के बाद एजीटीएफ ने विभिन्न संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा। टीम ने यूएई के अबू धाबी स्थित इंटरपोल से लगातार संपर्क में रहते हुए आरोपी से संबंधित आवश्यक सूचनाएं साझा कीं। तकनीकी एवं अन्य माध्यमों से आरोपी की लोकेशन ट्रेस कर उसकी जानकारी अबू धाबी इंटरपोल टीम तक पहुंचाई गई। इसके बाद वहां की टीम ने आरोपी को डिटेन कर लिया।

आरोपी के डिटेन किए जाने की सूचना मिलते ही उसे भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी क्रम में 31 अगस्त को जयपुर से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सिद्धांत शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम दुबई के लिए रवाना हुई। टीम में उपाधीक्षक पुलिस श्री रविंद्र प्रताप तथा पुलिस निरीक्षक श्री सुनील जांगिड़ और श्री राम सिंह नाथावत की टीमें शामिल रहीं। टीम ने आवश्यक कानूनी एवं समन्वय प्रक्रिया पूरी करते हुए आरोपी करण आसवानी को अपने कब्जे में लिया और गुरुवार देर रात उसे लेकर जयपुर पहुंच गई।

दुबई से जयपुर लाए गए करण आसवानी के खिलाफ अब न्यायालय के समक्ष आगे की विधिक कार्रवाई होगी। आरोपी से प्रकरण में विस्तृत अनुसंधान किया जाएगा। जयपुर में वारदात के बाद विदेश भागकर पुलिस की पकड़ से दूर जाने की कोशिश करने वाले आरोपी तक एजीटीएफ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलाश जारी रखते हुए पहुंच बनाई और इंटरपोल के साथ समन्वय के बाद उसे भारत लाने में सफलता हासिल की।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार करण आसवानी उर्फ कमल सिंधी का आपराधिक इतिहास भी लंबा है। उसके खिलाफ वर्ष 2000 में मुरलीपुरा थाने में हत्या के मामले से आपराधिक मुकदमों का सिलसिला शुरू हुआ था। इसके बाद वर्ष 2003 में शिप्रापथ थाने में बलवा, मारपीट और घर में घुसकर हमला सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज हुआ। वर्ष 2005 में इसी थाने में मारपीट, रास्ता रोकने और चोरी से जुड़ा प्रकरण दर्ज हुआ। वर्ष 2009 में मानसरोवर थाने में बलवा, मारपीट और घर में घुसकर हमला करने का मामला सामने आया।

इसके बाद वर्ष 2023 में बिंदायका थाने में अपहरण व जबरन वसूली, खोह नागोरियान थाने में अपहरण व जबरन वसूली तथा मानसरोवर थाने में जबरन वसूली, अपहरण व मारपीट से जुड़े मामले दर्ज हुए। आपराधिक गतिविधियों का यह सिलसिला वर्ष 2025 में खोह नागोरियान थाने में व्यापारी के अपहरण और संगठित अपराध से जुड़े मामले तक पहुंचा। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार करण आसवानी का अपराध की दुनिया से जुड़ाव नया नहीं, बल्कि ढाई दशक पुराना है।

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