जयपुर, 06 जनवरी 2026। राजस्थान की राजनीति में योजनाओं के नामकरण और उनके क्रियान्वयन को लेकर एक नया वैचारिक युद्ध छिड़ गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने आज एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विपक्ष द्वारा 'विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन' यानी 'वीबी-जी रामजी' (VB-G RAMJI) के नाम पर किए जा रहे विरोध का पुरजोर जवाब दिया। राठौड़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस को 'राम' के नाम से ही आपत्ति है, जबकि भाजपा का एकमात्र लक्ष्य गरीब को रोजगार और गांव का समग्र विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने विपक्ष के विरोध को 'हाय-तौबा' करार देते हुए कहा कि जो लोग गरीब के हक का पैसा खा जाते थे, आज उन्हें पारदर्शिता से दर्द हो रहा है।

राठौड़ ने कांग्रेस पर हमलावर होते हुए कहा कि जिस दल ने अपने शासनकाल में करीब 600 योजनाओं के नाम सिर्फ एक परिवार को खुश करने के लिए बदले, उसे आज रामजी के नाम पर ऐतराज करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि कैसे राजीव गांधी ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम का नाम बदलकर जवाहर रोजगार योजना किया, और बाद में मनमोहन सिंह सरकार ने इसे नरेगा (NREGA) और फिर मनरेगा (MGNREGA) में तब्दील कर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि इंदिरा आवास योजना और राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना जैसे नाम रखकर कांग्रेस ने हमेशा गांधी-नेहरू परिवार का महिमामंडन किया। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजपथ को कर्त्यव्य पथ, रेसकोर्स रोड को लोक कल्याण मार्ग और भारतीय दंड संहिता को भारतीय न्याय संहिता बनाकर औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति और 'सेवा व सनातन' के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाई है।

सांसद निधि के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाते हुए मदन राठौड़ ने कहा कि प्रदेश के कांग्रेस सांसदों ने अपने क्षेत्र की जनता के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों ने विकास के लिए आवंटित निधि को कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता सूरजेवाला (रणदीप सिंह सुरजेवाला) के पुत्र के निर्वाचन क्षेत्र में स्वीकृत कराकर अपने 'राजनैतिक आकाओं' को खुश करने का प्रयास किया है। राठौड़ ने दो टूक कहा कि सांसद निधि जनता की सेवा के लिए होती है, न कि राजनीतिक कृपा पात्र बने रहने का जरिया।

भ्रष्टाचार के पुराने घावों को कुरेदते हुए राठौड़ ने पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री रमेशचंद्र मीणा के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने स्वयं बाड़मेर और नागौर में 300 करोड़ रुपये के मनरेगा घोटाले की बात स्वीकार की थी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा सरपंचों को 'बोलेरो सरपंच' कहे जाने वाली टिप्पणी की भी याद दिलाई। राठौड़ ने कहा कि नए 'वीबी-जी रामजी' कानून के तहत अब भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। इस मिशन के तहत अब 100 की जगह 125 दिन की रोजगार गारंटी मिलेगी और पैसा सीधा लाभार्थी के बैंक खाते में जाएगा।

मदन राठौड़ ने मिशन की तकनीकी विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसमें बायोमैट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग और एआई (AI) तकनीक का उपयोग किया जाएगा ताकि फर्जी मस्टरोल और डुप्लीकेट जॉब कार्ड जैसी विसंगतियों को जड़ से खत्म किया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों की सुविधा के लिए बुवाई और कटाई के समय राज्य सरकारें 60 दिनों तक काम रोक सकेंगी ताकि श्रम की कमी न हो। इस नए कानून के माध्यम से 'विकसित ग्राम पंचायत' का सपना साकार होगा, जिससे ग्रामीण भारत प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत @2047' के संकल्प के साथ कदमताल कर सकेगा।

Pratahkal Newsroom

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